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कोशिकाओं की माप में बहुत विविधता देखने को मिलती है।
- सबसे छोटी कोशिका माइकोप्लाज़्मा गैलोसेप्टिक (Mycoplasma gallosepticum) नामक जीवाणु की होती है (जिसे प्ल्यूरोन्यूमोनिया लाइक ऑर्गेनिज्म, PPLO भी कहते हैं)। इसकी माप 0.1 माइक्रोमीटर तक पाई गई है।
- सबसे बड़ी कोशिका शुतुरमुर्ग (Ostrich) का अण्डा है (170 मिमी * 135 मिमी)।
- ऐसीटेबुल्रेरिया (Acetabularia) नामक एक शैवाल जो केवल एक ही कोशिका का बना होता है – 10 सेमी (100 मिमी) तक लम्बा होता है।
- अलसी, जूट या सनई जैसे रेशेदार पौधों में लम्बी – लम्बी तन्तु (Fibre) जैसी कोशिकाओं की लम्बाई 20 मिमी (2 सेमी) से लेकर 550 मिमी (5 सेमी) तक होती है।
- जन्तुओं के शरीर में ही तन्त्रिका कोशिकाएं (Nerve cells) जो कि सूचनाओं को विभिन्न अंगों से मस्तिष्क व मस्तिष्क से आदेशों को विभिन्न अंगों तक ले जाती हैं, 90 सेमी से 1 मीटर तक या इससे भी अधिक लम्बी हो सकती हैं।
कोशिका की आकृति का काफी हद तक सम्बंध उसके कार्य से होता है। उदाहरण के तौर पर तन्त्रिका कोशिका एक लम्बी पतली तार की तरह होती है, क्योंकि इसे शरीर के विभिन्न भागों में संदेश पहुंचाने होते हैं। कुछ जीवधारी जैसे अमीबा तथा जटिल जीवों की कुछ कोशिकाएं, जैसे हमारे रुधिर में पाई जाने वाली श्वेत रक्त कोशिकाएं (White Blood Corpuscles – WBC), अपनी आकृति बदलती रहती हैं। PPLO भी आकृति निरन्तर बदलते रहते हैं। सबसे बड़ी कोशिका शुतुरमुर्ग पक्षी के अण्डे (लम्बाई 175 मिमी.) की होती है। बहुकोशिक जीवधारीयों में मनुष्य की लाला कोशिका का व्यास लगभग 7.0 माइक्रोमीटर होता है। तन्त्रिका कोशिकाएं सबसे लम्बी कोशिकाओं में होती हैं।
जीवधारियों में कोशिकाओं की संख्या – एककोशिकीय जीवधारी तो एक ही कोशिका के बने होते हैं, परन्तु जटिल जीवधारीयों में कोशिकाओं की संख्या समय- समय पर बदलती रहती है। कोशिकाओं की संख्या विभिन्न जीवों में भिन्न – भिन्न होती है। हाथी के शरीर में कोशिकाओं की संख्या चूहे की अपेक्षा बहुत अधिक होती है। इसी प्रकार गुलाब के पौधे की अपेक्षा वृक्ष में कोशिकाओं की संख्या बहुत अधिक होती है। मानव शरीर में लगभग पांच हजार अरब कोशिकाएं होती हैं।
अभी आगे जारी है ...