भारतीय अंतरिक्ष - कार्यक्रम ( part -1)

1963 ई॰--- तिरुअनंतपुरम के निकट 'थुम्बा भू - मध्यरेखीय रॉकेट प्रक्षेपण केंद्र '( टी० ई० आर० एल ० एस ) स्थापित किया गया। 21 नवम्बर को थुम्बा से अत्यधिक शोर करने वाला दो चरणों का पहला रॉकेट छोड़ा गया ।

1969 ई ०--- अंतरिक्ष के शान्तिपूर्ण प्रयोग के लिए 'भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन '(इसरो )का गठन किया गया ।

1972 ई०--- 'अंतरिक्ष विभाग ' एवं ' अंतरिक्ष आयोग ' का गठन हुआ । पार्थिव संसाधनों के सर्वेक्षण के लिए विमान से दूर - संवेदी प्रयोग शुरू किए गए ।

1975 ई०--- 19 अप्रैल को भारत का पहला उपग्रह  आर्यभट्ट; सोवियत संघ से छोड़ा गया ।

1979 ई०--- सोवियत संघ से ही 7 जून को भारतीय  उपग्रह भास्कर - 1 छोड़ा गया ।

1980 ई०--- श्रीहरिकोटा से भारत निर्मित उपग्रह प्रक्षेपण वाहन  एस ० वी०-3 के द्वारा 18 जुलाई को  35 किलोग्राम वजन का 'प्रथम रोहिणी उपग्रह' कक्षा में भेजा गया ।

1981 ई--- श्रीहरिकोटा से एस  एल वी -3 के जरिए ही 31 मई को 'दूसरा रोहिणी उपग्रह' छोड़ा गया । 19 जून को फ्रेंच गुयाना में कोरू से एरियान रॉकेट के द्वारा भारत का पहला प्रायोगिक 'भू - स्थैतिक संचार उपग्रह छोड़ा गया ।

1982 ई--- अमेरिका से प्राप्त बहुउद्देशीय उपग्रह  इन्सेट  1 - ए 10 अप्रैल को अमेरिकी प्रक्षेपण केन्द्र से छोड़ा गया।

1983 ई--- एस  एल वी -3 के जरिए 17 अप्रैल को श्रीहरिकोटा से 35 किलोग्राम भार वाला तीसरा रोहिणी उपग्रह छोड़ा गया ।दूसरा बहुउद्देशीय उपग्रह  इन्सेट 1 -बी 30 अगस्त को अमेरिकी अंतरिक्ष यान चैलेंजर के द्वारा अंतरिक्ष में भेजा गया ।

1984 ई--- भारत तथा सोवियत संघ के  अंतरिक्ष यात्रियों से युक्त प्रथम  अंतरिक्ष अभियान  ( ओडिसी )तीन  अप्रैल को शुरू हुआ । इस सफल  अभियान में स्क्वैड्रन लीडर राकेश शर्मा ने प्रथम भारतीय  अंतरिक्ष यात्री होने का श्रेय प्राप्त किया 

आगे जारी है .....

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