गुस्ताव कुर्वे (1819 - 1877 ई0)
कुर्वे का जन्म 1819 ई0 में फ्रांस में हुआ था।
1855 ई0 और 1867 ई0 में कुर्वे द्वारा अपनी प्रदर्शनियाँ आयोजित करने से व्यक्तिगत प्रदर्शनी करने की प्रथा प्रारम्भ हुई।
कुर्वे को परम्पराओं का विद्रोही चित्रकार भी माना जाता है। इनका उत्कृष्ट चित्र ओर्ना का दफन संस्कार यथार्थवादी कला का सर्वोत्तम चित्र माना जाता है। कुर्वे ने कहा था कि- ‘‘मैंने अपने चित्र के साथ ही स्वच्छत्दतावादी कला को भी दफन कर दिया।’’
यथार्थवादी प्रेरणाओं में कुर्वे को प्रमुख स्थान दिया जाता है।
कुर्वे ने पत्थर तोड़ने वाले शीर्षक से चित्र बनाया। कुर्वे ने दैनिक जीवन पर भी चित्र बनाया।
प्रमुख चित्र:-
1. कुत्ते के साथ चित्रकार कुर्वे
2. ओरना का भोजन
3. ओरना का दफन संस्कार
4. स्नानमग्ना युवती (कछुआ व तीन स्नानमग्नाएँ-हेनरी मातिस) (स्नान मग्ना युवतियाँ-पाॅल सेजाॅ)
5. तोता वा तरूणी
6. सेन नदी के किनारे दो महिलायें
7. चित्रकार का कार्य कक्ष
8. नमस्ते कुर्वे महोदय
9. तीन पेड़
10. पेन्टर इन स्टूडियो
11. पाइप वाला आदमी।
कुर्वे महोदय कहते थे, मुझे देवता दिखाओं मैं उनका चित्र खींचूँगा।
आप नारी चित्रण में विशेष दक्षता हासिल किए हुए थे।
नोट:-
1. कुर्वे - चित्रकार का कार्य कक्ष
2. कोरे - कलाकार का कार्यकक्ष
3. मातिस - लाल चित्र कला कक्ष
4. पिकासो - मूर्तिकार का कार्यकक्ष
5. मोरिस देनी $ दोमिलियर - पवित्र कला के कलाकक्ष