भारत में समाजवाद

 वैसे तो भारतीय समाज प्राचीन काल से ही समाजवाद के विभिन्न आयामों के लिए प्रतिबद्ध था परंतु आधुनिक समाजवाद का आगमन भारत में मूलतः 1970 ईस्वी में रूस की साम्यवादी क्रांति की सफलता से उतरी था जिस प्रकार रूसी समाजवादी व्यवस्था सामंतवादी थी उसी तरह तत्कालीन भारतीय समाज भी कृषि आधारित सामंतवादी व्यवस्था के अधीन था भारत में समाजवादी चिंतन सैद्धांतिक रूप से पूंजीवाद का विरोध करने के अतिरिक्त ब्रिटिश का विरोधी रहा है दूसरे शब्दों में भारतीय समाजवादी चिंतन राष्ट्रीय स्वाधीनता आंदोलन की पृष्ठभूमि उसके पोषक तत्व के रूप में विकसित हुआ यह अलग बात है कि अति वामपंथी विचारधारा के पोषक उसके समर्थकों ने महात्मा गांधी को पूंजीपतियों का भारत छोड़ो आंदोलन का विरोध किया भारत में समाजवाद को लाने का श्रेय को है उसके बाद मुल्तान नरेंद्र देव जय प्रकाश नारायण और राम मनोहर लोहिया के विचारों में हमें समाजवाद के लक्षण परिलक्षित होते हैं भारत में समाजवादी चिंतन के विकास क्रम के विवेचना से पूर्व कुछ विशिष्ट तत्वों का उल्लेख आवश्यक है जो इसे पाश्चात्य जगत में समाजवाद के प्रचार-प्रसार से प्रथक करते हैं सर्वप्रथम हमें इस बात को ध्यान में रखना होगा कि पश्चिमी जगत व भारत में समाजवादी विचारधारा के उत्पन्न होने की परिस्थितियां निर्गुण जाति व्यवस्था के सामाजिक आर्थिक दुष्परिणामों की प्रक्रिया के रूप में सामने आई जबकि भारत में यह व्यवस्था अंग्रेजों के विरोध के लिए सामने लाई गई अंततोगत्वा भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन को प्रेरित करने का एक विशेष विचारधारा बनी

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