मेसोपोटामिया सभ्यता की कला

                             मेसोपोटामिया सभ्यता की कला

    मेसोपोटामिया का तात्पर्य या शाब्दिक अर्थ दो नदियों के बीच का भूभाग अर्थात दोआब होता है।
    वर्तमान इराक क्षेत्र में दजला व फरात नदियों के बीच में मेसोपोटामिया की कला तीन हजार/पाँच हजार ईसा वर्ष पूर्व में विकसित हुई।
    मेसोपोटामिया की सभ्यता के केन्द्र नगर थे, और नगरों के केन्द्र मंदिर थे, तथा मन्दिरों का केन्द्र जिगुरत थे।
    इस भू-भाग में सुमेर, अक्काल, बेबीलोनिया तथा असीरिया का सम्पूर्ण क्षेत्र शामिल था। यही मेसोडोनिया कला के प्रमुख केन्द्र बने।
    प्राचीन मेसोपोटामिया सभ्यता का सबसे प्रमुख केन्द्र सुमेर था। सुमेर नगर मेसोपोटामिया भू-भाग के दक्षिण में स्थित है, इसीलिए मेसोपोटामिया की सभ्यता को सुमेरिया की सभ्यता भी कहा जाता है।
    लगभग 3000 बी0 सी0 में हम्मूराबी ने मेसोपोटामिया के दक्षिण भू-भाग में अपनी राजधानी बनाया और बेबीलोनिया नगर में कला केन्द्र की स्थापना की।
    यहाँ की खुदाई में रानी सुबअद की समाधि से सोने के तारो से युक्त पेटिका, नीलम जड़ित अँगूठी, कण्ठहार, कर्णफूल, कड़े आदि मिले है।
    मेसोपोटामिया के उर नगर से एक मानव धड़ मिला है, जो मानव की उपलब्ध सबसे प्राचीन मूर्ति है।
    मेसापोटामिया में पहले सुमेरियन उसके बाद बेबीलोनियाँ की सभ्यता आई।
    बेबीलोन में झूलते बाग (भ्ंदहपदह ळंतकमद) का उल्लेख मिलता है। बेबीलोन काल में भित्ति चित्रण की परम्परा भी विकसित हुई।
    मेसोपोटामिया के उर नगर की समाधि से रानी पूवा का वीणा मिला है।
 

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