चक्रवात अपने पूरे तंत्र के साथ लगभग 20 किमी. प्रति घंटा औसत गति से आगे बढ़ता है। जैसे जैसे चक्रवात स्थल बढ़ता जाता है, समुद्री जल के आभाव में इसकी ऊर्जा घटती जाती है। इससे चक्रवात समाप्त हो जाता है। चक्रवात की जीवन अवधि 5 से 7 दिनों तक की होती है। 600 किमी या इससे अधिक व्यास वाले चक्रवात, पृथ्वी के वायुमंडलीय तूफानों में सबसे अधिक विनाशक और भयंकर होते हैं। भारतीय उपमहाद्वीप, संसार के चक्रवातों द्वारा सबसे अधिक दुष्प्रभावी क्षेत्र हैं। संसार में आने वाले चक्रवातों में से 6 प्रतिशत यहीं आते हैं।
उष्ण कटिबंधीय चक्रवातों की उत्पत्ति के विषय में कोई भी सर्वमान्य सिद्धांत नहीं है। जब कमजोर रूप से विकसित काम दबाव के क्षेत्र के चारों ओर तापमान की क्षैतिज प्रवंता बहुत अधिक होती है। तब उष्ण कटिबंधीय चक्रवात बन सकता है। ऊष्मा चक्रवात का इंजन है तथा इस सागरीय तल से ऊष्मा मिलती है। संघनन के बाद मुक्त ऊष्मा, चक्रवात के लिए गतिज ऊर्जा में बदल जाती है:
* महासागरीय तल का तापमान 27 डिग्री से. से अधिक।
* बंद समदाब रेखाओं का अविभारव