अटठारह सौ सत्तावन का विद्रोह

यह विद्रोह ब्रिटिश शासन के विरुद्ध भारतीयों के द्वारा छेड़ा जाने वाला प्रथम सशक्त विद्रोह था, जिसने पहली बार भारत के  एक विशाल क्षेत्रफल व जनसंख्या को प्रभावित किया। यद्यपि इस विद्रोह का अंग्रेजों ने अपने प्रौद्योगिकीय श्रेष्ठता एवं बर्बर कृत्यों के नंगे प्रदर्शन के बल पर अंधाधुंध  दमन किया, तथापि विद्रोह के काल में भारतीयों ने अंग्रेज़ो के लिए गंभीर चुनौतिया उत्पन्न की। इस विद्रोह ने ही पहली बार भारतीयों  को इस बात की सोच दी कि यदि संगठित होकर संघर्ष किया जाए, तो अंग्रेज़ो को भारत से खदेड़ा का सकता है।

1857 के विद्रोह ने अपने संचरण काल में ब्रिटिश शासन व भारतीय जनजीवन के लिए चाहे जितनी उथल पुथल मचाया हो, परन्तु इसका परिणाम दूरगामी रूप  से काफी प्रभावशाली था । उसने परवर्ती काल में विकसित  होने वाले राष्ट्रवादी भावनाओ के लिए एक उर्वरक तत्व के रूप में काम किया। भारतीय  उन बलिदानों को भूलने में असमर्थ थे, जो उन्होंने इस विद्रोह के दौरान किए थे। अंग्रेज़ो ने, न केवल  विद्रोह काल में, अपितु विद्रोह का दमन करने के बाद भी सामूहिक हत्याकांडों और क्रूरताओं से भारतीय जनमानस को क्षुब्ध कर दिया था।

सर थाम्पसन एडवर्ड ने कहा था :

                  "जब भी कोई भारतीय किसी अंग्रेज के साथ बात करता है, तो उसके दिमाग की तह में एक प्रेत की तस्वीर घूमती है, जो बदले की भावना से प्रेरित है और जिसका चित्त बदला न ले  सकने के कारण अशांत है।"

Posted on by