इस अधिवेशन का आयोजन 1886 ईसवी में कलकत्ता में दादा भाई नौरोजी की अध्यक्षता में सम्पन्न हुआ। पहले अधिवेशन में जहां मात्र 72 प्रतिनिधियों ने भाग लिया था, वही इसमें कुल 434 सदस्यों ने भाग लिया। अधिवेशन में ए. ओ. ह्युम को नियमत: कांग्रेस का महासचिव मान लिया गया और सभी महत्वपूर्ण केंद्रों में स्टैंडिंग कांग्रेस कमेटी बनाने का फैसला किया गया।
कांग्रेस के इस सम्मेलन के पश्चात भारत के वायसराय लॉर्ड डफरिन ने इसके प्रतिनिधियों को गार्डन पार्टी दी।
दादा भाई नौरोजी नरमपंथी विचार धारा के समर्थक थे। उन्हें भारत का शानदार वयोवृद्ध पुरुष (Grand old man of India) कहकर पुकारा जाता था। गांधी जी ने इन्हे ' भारत का पितामह ' कहकर पुकारा है। इन्होंने सन 1867 में लंदन में ' ईस्ट इंडिया एसोसिएशन ' ( East India Association ) की स्थापना की ।उन्हें अंग्रेज़ो की न्यायप्रियता में दृढ़ विश्वास था इन्होंने 1867 में ' England Dept to India' नामक अपने पेपर में ' धन के बहिर्गमन के सिद्धान्त ' (Drain of wealth) को पेश किया । उन्होंने 1901 में Poverty and Unbritish Rule in India नामक पुस्तक में भारत में बढ़ रही गरीबी को तथ्य व तर्को के आधार पर प्रतिपादित किया । नौरोजी ने कांग्रेस की स्थापना के साथ इसके अधिवेशनों में अपनी भागीदारी प्रारम्भ कर दी थी। उन्होंने कुल तीन बार कांग्रेस अधिवेशन की अध्यक्षता की, कलकत्ता अधिवेशन 1886, लाहौर अधिवेशन 1893, कलकत्ता कांग्रेस अधिवेशन 1906 ।