हिन्दू सभा नाम से 1909 में पंजाब में यू एन मुखर्जी एवं लालचंद ने एक संगठन की स्थापना की। इस संगठन का उद्देश्य हिन्दू धर्म एवं अनुयायियों के संरक्षण तक सीमित था। अप्रैल 1915 में कासिम बाज़ार के महाराज मनींद्र चन्द्र नंदी की अध्यक्षता में अखिल भारतीय हिन्दू महासभा का गठन किया गया। इसके प्रमुख नेताओं में मदनमोहन मालवीय, लाजपत राय एवं मुकुंद राव जयकर जैसे नेता थे। पहले हिन्दू धर्म सुधार तक सीमित रहने वाला यह संगठन उस समय राजनैतिक स्वरूप धारण कर लिया जब वी. डी. सावरकर इसके अध्यक्ष बने।
कालांतर में यह मुस्लिम लीग का प्रतिक्रियात्मक संगठन बन गया। और भारत विभाजन के लिए पृष्ठभूमि तैयार करने में मदद किया। इसके नेताओं ने भी मुस्लिम लीग की ही तरह " हिन्दू राष्ट्र " की मांग की।