Day- 72
सामान्य विधिक अधिकार व मूल अधिकार
- सामान्य विधिक अधिकार देश की विधि द्वारा संरक्षित और प्रवृत्त किया जाता है। जैसे उपभोक्ता के अधिकार. शेयरधारक के अधिकार, बन्धनकर्ता के अधिकार, संविदा के पक्षकारों के अधिकार आदि। जबकि मूल अधिकार संविधान द्वारा रक्षित होता है और संविधान ही उसे प्रवृत्त करता है।
- सामान्य विधिक अधिकार को साधारण विधायी प्रक्रिया द्वारा बदला जा सकता है। मूल अधिकार में परिवर्तन के लिए संविधान का संशोधन करना आवश्यक है।
- सामान्य विधिक अधिकार साधारणतः किसी अन्य व्यक्ति पर उसका प्रतिरुप कर्तव्य अधिरोपित करता है। मूल अधिकार ऐसा अधिकार है जिसमें किसी व्यक्ति को राज्य के विरुध्द अधिकार प्राप्त होता है। अतएव मूल अधिकार राज्य को भी आबध्द करता है।
सामान्य विधिक अधिकार व्यक्तियों के विरुध्द उपलब्ध होता है और कुछ मामलों में राज्य के विरुध्द भी। मूल अधिकार केवल राज्य के विरुध प्रवर्तनीय होता है।
शेष फिर..