1757 कि प्लासी विजय के बाद अंग्रेजों ने क्रमशः समस्त भारतीय व्यवस्था पर प्रभुत्व स्थापित कर लिया और भारतीय संसाधनों पर बलपूर्वक शोषण करने लगे वर्षों का भीषण उत्पीड़न ही विद्रोह का महत्वपूर्ण कारण बना भारतीयों का अनुमान जीवन संपत्ति सभी खतरे में पड़ गए अतः अपनी अस्मिता बचाने के लिए यह व्यापक विद्रोह किया गया ।
1857 के पहले भी ब्रिटिश सत्ता के विरुद्ध विद्रोह होते रहे किंतु वे सैनिक जनजातियों वह कृषक विद्रोह कहलाए क्योंकि वह क्षेत्रीरीय विद्रोह होते थे तथा इनके विद्रोह के कारण उस वर्ग का शोषण होता था किंतु 957 का महा विद्रोह इसलिए अलग था कि इस विद्रोरोह में बहुत से वर्गों का प्रतिनिधित्व था और साथ ही मुख्यतः उत्तर भारत के कई क्षेत्रों में यह प्रसारित हुआ ।
29 मार्च को बैरकपुर छावनी में मंगल पांडे में विद्रोह की शुरुआत कर दी और विद्रोह के प्रथम शहीद भी बने इसी क्रम में 9 मई को मेरठ के सैनिकों मेरठ के सैनिकों ने एकजुट होकर विद्रोह का आह्वान कर दिया और शीघ्र ही दिल्ली पहुंच कर उन्होंने बहादुर शाह जफर को विद्रोह का नेता घोषित कर दिया स्पष्ट है अंतिम मुगल सम्राट के रूप में किसी क्षेत्र या वर्ग के नेता नहीं थे बल्कि वह हिंदुस्तान के नेतृत्व कर्ता के रूप में संपूर्ण भारत के प्रतिनिधि थे 18 सो 57 का विद्रोह भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास का वह अध्ययन से पढ़े बिना विश्लेषण किए बिना हमारा स्वतंत्रता संघर्ष का अध्ययन अधूरा रह जाएगा । इसके लिए कई राजनीतिक कारण ,सामाजिक व धार्मिक कारण ,आर्थिक प्रशासनिक कारण ,सैनिक कारण ,तात्कालिक कारण उत्तरदायी हैं।