गांधीजी दार्शनिक रूप में अराजकतावादी थे अर्थात राज्य की सत्ता में विश्वास नहीं करते थे ।उनका मानना था कि राज्य में आत्मा नहीं होती है अतः उसे हिंसा से अलग भी नहीं किया जा सकता ।अर्थात राज्य हिंसा का सार है ।जिसे आदर्श रूप में स्वीकारा नहीं जा सकता। गांधी एक आदर्श राज्य की संकल्पना के रूप में रामराज्य को महत्वपूर्ण मानते हैं ।जिससे उनका आशय ऐसी व्यवस्था से है ,जिसमें सभी व्यक्ति आत्मानुशासन तथा अनियंत्रित हो सभी में सहयोग की भावना हो ऐसे में कोई दूसरे को हानि नहीं पहुंचाएगा और यही वास्तविक स्वराज्य है किंतु व्यवहार में गांधी पूर्ण विकेंद्रीकृत के समर्थक थे। उन्होंने ग्राम सभाओं को पुनर्जीवित करने का विचार रखा ग्राम पंचायतों से सभी लोगों को सहयोगात्मक कार्यों का प्रशिक्षण दिया जा सकता था लोगों की राजनीतिक ऊर्जा को बनाए रखा जा सकता था ।गांधी जी को विश्वास था कि पूर्ण विकेंद्रीकरण से सभी का लाभ होगा सब की बात सुनी जाएगी और शासन मेंं सबकी भागीदारी सुनिश्चित होगी।गांधी के विचारों के आधार पर ही अनुच्छेद 40 के तहत ग्राम पंचायत की गई थी। बाद में 73 व 74 संविधान संशोधन में लागू किया गया ।
इन्होंने मशीनीकरण का विरोध किया ये माना कि जहां श्रमिकों की कमी होती है वहां पर मशीनों की अधिकता होनी चाहिए लेकिन भारत जैसे देश में जहां बेरोजगारी ज्यादा है वहां पर ऐसी मशीनों का क्या उपयोग ।
गांधी जी ने श्रम को भी बहुत महत्व दिया है उन्होंने कहा कि मनुष्य की वास्तविक संपत्ति श्रम ही है ।उनके अनुसार बिना श्रम किए किसी भी व्यक्ति को एक समय का भोजन करने का अधिकार नहीं है उनका स्पष्ट मानना था कि सभी लोगों के श्रम का मूल्य समान होता है। अतः सबको अपने कर्तव्य के प्रति सम्मान व निष्ठा का भाव रखना चाहिए ।
उन्होंने स्वदेशी का समर्थन करते हुए कहा कि जब तक हम स्वदेशी भावना का विकास नहीं कर लेते तब तक हम स्वावलंबन का वास्तविक स्वतंत्रता हासिल नहीं कर सकेंगे ।
गांधी जी ने यह सिद्धांत दिया कि यदि धनवान व्यक्ति ट्रस्टीशिप का पालन करना सीख जाए तो समाज में जो गरीबी और अमीरी की बीच की खाई है उसको पाटने में मदद मिलेगी। धनवान व्यक्तियों के हृदय परिवर्तन से ही संभव हो सकता है यहां पर महात्मा गांधी कुछ ज्यादा ही आदर्शवादी हो गए थे क्योंकि किसी भी व्यक्ति का इस तरह से हृदय परिवर्तन संभव नहीं है।
परंतु हम देखते हैं कि महात्मा गांधी ने भारतीय समाज के अनुरूप जो अपने विचार व्यक्त किए वह आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं।