आर्यभट्ट :
यह स्वदेशी तकनीक से निर्मित भारत का प्रथम उपग्रह है। 360 kg वजन इस उपग्रह को इंटर कॉसमॉस प्रक्षेपण यान द्वारा पूर्व सोवियत संघ के बैकानूर अंतरिक्ष केंद्र से पृथ्वी के निकट वृत्तीय कक्षा में 594 किलोमीटर ऊंचाई पर सफलतापूर्वक स्थापित किया गया।
इस उपग्रह के प्रमुख कार्य थे- सौर- भौतिकी प्रयोग, एक्स किरण खगोलिकी प्रयोग तथा वायु विज्ञान प्रयोग।
भास्कर प्रथम:
पूर्व सोवियत संघ के बैकानूर प्रशिक्षण केंद्र से 7 जून 1979 को प्रक्षेपण यान का समूह द्वारा पृथ्वी के निकट वृत्तीय कक्षा में 525 किलोमीटर की ऊंचाई पर सफलतापूर्वक स्थापित किया गया। इसका कार्य हिम गलन, समुद्र विज्ञान वानिकी एवं जल विज्ञान के क्षेत्र में भू परीक्षण अनुसंधान करना था।
रोहिणी श्रंखला:
रोहिणी श्रंखला उपग्रहों का मुख्य् उद्देश्य भारत का प्रथम उपग्रह प्रक्षेपण यान एस एल वी - 3 का परीक्षण करना था। इसकेे अंतर्गत भारतीय प्रक्षेपण केंद्र श्री्रीहरिकोटा से भारतीय प्रक्षेपण यान एस एल वी - 3 द्वारा 4 उपग्रह प्रक्षेपित किए गए, जिनमें प्रथम एवंं तृतीय परीक्षण असफल रहा। 18 जुलाई 1980 को इस श्रंखला का द्वितीय परीक्षण रोहिणी आर एस - वन को श्री्रीहरिकोटा प्रक्षेपण यान एस एल वी- 3 द्वारा सफलतापूर्वक प्रक्षेपित किया गया। जो भारतीय प्रक्षेपण यान द्वारा भारतीय भूमिि से प्रक्षेपित प्रथम भारतीय उपग्रह बना।
विस्तारित विस्तारित रोहिणी उपग्रह श्रंखला( स्त्रात) :
इस श्रृंखला के अंतर्गत स्त्रास - 1 से लेकर स्त्रास - 4 तक की 4 उपग्रहों को प्रक्षेपित किया गया जिसमें स्त्रास - 3 एवं स्त्रास - 4 ही सफल रहें। इन उपग्रहों को संवर्धित उपग्रह प्रक्षेपण यान( Augmented Satellite Launch Vehicle - ASLV) द्वारा छोड़ा गया था।इसका उद्देश्य 100 से 150 किग्रा वर्ग के उपग्रहों का निर्माण करना था।
एप्पल:
यह भारत का प्रथम प्रयोगिक संचार उपग्रह है इसे 19 जून, 1981 को फ्रेंच गुयाना के कोरू अंतरिक्ष प्रक्षेपण केंद्र से यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी के एरियन-4 प्रक्षेपण यान द्वारा भू स्थैतिक कक्षा में लगभग 3600 किलोमीटर की ऊंचाई पर स्थापित किया गया एजेंसी के एलियन फोरस ऐपण यान द्वारा भू स्थैतिक कक्षा में लगभग 3600 किलोमीटर की ऊंचाई पर पर स्थापित किया गया ।
इस उपग्रह को उपयोग घरेलू संचार व्यवस्था, रेडियो नेटवर्क, डाटा संप्रेक्षण एवं राष्ट्रीय संचार व्यवस्था को आधुनिक बनाने इत्यादि में किया गया।