बौद्धिक संपदा अधिकार विचारों आविष्कारों तथा सृजनात्मक अभिव्यक्तियों तथा उनको संपत्ति का दर्जा दिए जाने के संबंध में जनता की सहमति तथा उसके स्वामित्व धारी को अधिकार दिए जाने से संबंधित है
- के अंतर्गत प्रदान किए जाने वाले बौद्धिक संपदा अधिकार हैं-
- कॉपीराइट एवं इससे संबंधित अधिकार
- ट्रेडमार्क
- भौगोलिक संकेतक
- औद्योगिक रूपरेखा
- पेटेंट
- विश्व व्यापार संगठन से संबंधित सम्मेलन सिंगापुर , सिएटल , दोहा, हांग कांग ,बाली आदि स्थानों पर हुए हैं।
- सिंगापुर मुद्दे की शुरुआत वर्ष 1996 में WTO की बैठक के दौरान हुई ।
- इस सम्मेलन में प्रतिस्पर्धा्वि, विनियोग, सरकारी क्रय मैं पारदर्शिता तथा व्यापार मैं सरलता एवं आसानी केे प्रयास पर विकसित एवं विकासशील देशों के बीच आम सहमति नहीं बन सकी।
- WTO का डब्ल्यूटीओ का सबसेे महत्वपूर्ण् सम्मेलन दोहा सम्मेलन है।
दोहा सम्मेलन
- दोहा की वार्ता को दोहा विकास डर कहां गया।
- दोहा दौर की वार्ता मैं कृषि, गैर कृषि बाजार पहुंच (NAMA) सेवाओं से संबंधित नियम, बौद्धिक संपदा एवं इससे जुड़े भौगोलिक संकेतक एवं जैव विविधता , व्यापार एवं पर्यावरण, एंटी डंपिंग आदि मुद्दे शामिल थे।
- दोहा दौर की वार्ताएं मुख्यता गतिरोध में ही चलती रही। इसमें विकसित तथा विकासशील देशों के बीच मुख्यतया कृषि संबंधी मुद्दे, व्यापार सुधार आदि को लेकर संशय की स्थिति बनी रही।
- कृषि पर दी जाने वाली सब्सिडी दोहा मुद्दे का मुख्य विषय रहा है।
- कृषि सब्सिडी के समर्थक यानी विकासशील देश कृषि सब्सिडी को विश्व व्यापार संगठन के नियमों में बांधने के पक्ष में नहीं है।
- दोहा मुद्दे में व्यापार सरलीकरण ऐसा मुद्दा है जिस पर काफी प्रगति हुई है । 2013 की बाली बैठक में WTO के अंतर्गत व्यापार सरलीकरण हेतु समझौता हो गया है।
गैर कृषि बाजार पहुंच(Non Agricultural Market Access - NAMA)
- नामा संबंधी वार्ता को वर्ष 2001 में दोहा दौर की वार्ता में शामिल किया गया था।
- इसमें नामा के अंतर्गत विकासशील देशों की निर्यात योग्य वस्तुओं पर प्रशुल्क में कमियां उन्हें समाप्त करने की बात कही गई थी।
- नामा पर वर्ष 2002 में औपचारिक बातचीत शुरू हुई। वर्ष 2003 में विकसित एवं विकासशील देशों के मध्य प्रशुल्क कम करने की पद्धति को लेकर विवाद हो गया था।
- विकसित देशों के अनुसार नामा (Nama) के अंतर्गत किसी देश की वर्तमान प्रशुल्क दरों यह रूपरेखा को देखे बिना ही प्रशुल्क दरों में तीव्र कमी लाना था। इसे स्विस फार्मूला कहा गया।
- आगे चलकर इस फार्मूले में सुधार किया गया तथा विकासशील देशों के समूह जिन्हें NAMA- 11 कहा जाता है के द्वारा इसका समर्थन किया गया।