भारतीय संविधान Easy Notes - 74 (मूल अधिकार या मौलिक अधिकार)

Day- 74

सभी व्यक्तियों को उपलब्ध मूल अधिकार

  • कुछ अधिकार भारत में नागरिक और विदेशी दोनों को समान रूप से उपलब्ध हैं (किंतु विदेशी शत्रु को नहीं) ऐसे मूल अधिकार हैं- 
    1.  अनुच्छेद 14 - विधि के समक्ष समता
    2.  अनुच्छेद 20 -  अपराधों के लिए दोषसिद्धि के संबंध में संरक्षण (उदाहरणार्थ- दोहरा दंड, स्वयं को अपराध में फंसाना)
    3.  अनुच्छेद 21 -  प्राण और दैहिक स्वतंत्रता का अधिकार
    4.  अनुच्छेद 21 - शिक्षा का अधिकार
    5. अनुच्छेद 23 और 24 -  शोषण के विरुद्ध अधिकार
    6.  अनुच्छेद 25 से 28 – धर्म की स्वतंत्रता
  • राज्य की परिभाषा अनुच्छेद 12 में दी गई है। यह परिभाषा निःशेषकारी नहीं है बल्कि यह समावेशक है।
  • राज्य की परिभाषा में अभिव्यक्त रूप से निम्नलिखित सम्मिलित हैं-
  1. भारत की सरकार और संसद
  2. प्रत्येक राज्य की सरकार और विधानमंडल
  3. सभी स्थानीय प्राधिकारी, और
  4. भारत के भीतर या भारत सरकार के नियंत्रण के अधीन अन्य प्राधिकारी
  • न्यायालय के निर्णय द्वारा राज अभिनिर्धारित किया गया है –
    1.  राज अधिनियम के अधीन पंजीकृत सोसायटी द्वारा स्थापित प्रादेशिक इंजीनियरिंग महाविद्यालय
    2. भारतीय संख्या की संस्थान भारतीय
    3. कृषि अनुसंधान परिषद
    4. भारतीय खाद्य निगम
    5. भारतीय इस्पात प्राधिकरण
    6. राष्ट्रीयकृत बैंक
    7. राज्य विद्युत बोर्ड
    8. अंतर्राष्ट्रीय विमानपत्तन प्राधिकरण
    9. तेल और प्राकृतिक गैस आयोग
    10. वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद
  • अनुच्छेद 13 राज्य पर यह बाधा डालता है कि वह मूल अधिकारों का आदर करें और उनके अनुपालन करें। साथ ही यह अनुच्छेद न्यायालयों को यह शक्ति देता है कि वह ऐसे कार्य विधि को शून्य घोषित कर दे जो मूल अधिकार का उल्लंघन करती हैं। इस शक्ति को न्यायिक पुनर्विलोकन’ की शक्ति कहते हैं।
  • अनुच्छेद 13 मूल अधिकारों को सर्वोच्च स्थान पर प्रतिष्ठित करता है। इसमें या घोषणा की गई है कि वे सभी विधियां जो किसी मूल अधिकार से असंगत हैं या  उसके प्रतिकूल  हैं  असंगतता  की मात्रा तक शून्य होगी।
  • अनुच्छेद 13(1‌) और 13(2) में यह कहा गया है कि विधियां असंगत होने की या उल्लंघन की मात्रा तक शून्य होगीं। असंगतता या उल्लंघन का प्रभाव संपूर्ण विधि या कार्य पर नहीं पड़ता। अनुच्छेद 13 उसके प्रभाव को असंगतता की मात्रा तक बांधे रखता है। दूसरे शब्दों में ‘पृथक्करण का सिद्धांत’ लागू होगा।

मिलते है हम अगले दिन, अधिकार या मौलिक अधिकार विषय पर फिर आगे  चर्चा करने के लिए..

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