भारतीय राष्ट्रीय उपग्रह(Indian National Satellite - INSAT) :
संचार पर्यटन और नागरिक उड्डयन तथा सूचना और प्रसारण पर्यटन और नागरिक उड्डयन तथा सूचना और प्रसारण मंत्रालय के सहयोग से अंतरिक्ष विभाग ने 'भारतीय राष्ट्रीय उपग्रह' इन्सैट प्रणाली अंतरिक्ष विभाग ने भारतीय राष्ट्रीय उपग्रह इनसैट प्रणाली 1983 से शुरू की है।
इनसैट प्रणाली एक बहुउद्देशीय कार्य संचालन संबंधी अंतरिक्ष प्रणाली है जो भूस्थिर परिक्रमा करने वाले एक उपग्रह से दूर संचार, मौसम विज्ञान और दूरदर्शन सेवाएं उपलब्ध कराती है।
इस प्रणाली में एक बहुत महत्वपूर्ण दूरसंचार व्यवस्था है जिसके द्वारा दूर के क्षेत्रों में टेलीफोन संपर्क हो सकता है। मौसम विज्ञान संबंधी सुविधा के अंतर्गत 24 घंटे मौसम की जानकारी मिल सकती है, आंकड़े एकत्रित किए जा सकते हैं और दूरदराज के निर्जन स्थानों से रिले और संकट संबंधी पूर्व चेतावनी की सुविधा दी गई है।
दूरदर्शन क्षमता के अंतर्गत उपग्रह से ग्रामीण क्षेत्रों में सामुदायिक टीवी सेट पर सीधा प्रसारण और रेडियो प्रसारण हो रहे हैं
भारतीय दूरसंवेदी उपग्रह प्रणाली(Indian Remote Sensing Satellite - IRS) :
इस उपग्रह प्रणाली के अंतर्गत पृथ्वी के गर्भ में छुपे संसाधनों को स्पर्श किए बिना प्रकीर्णन विधि द्वारा विश्वासनीय और प्रमाणित जानकारी उपलब्ध कराई जाती है। इस उपग्रह प्रणाली का प्रमुख उद्देश्य प्राकृतिक संसाधनों का सर्वेक्षण और सतत निगरानी है। दूर संवेदी उपग्रह के उपयोग से सुदूर संवेदन की प्रक्रिया को एक निश्चित अंतराल के बाद दोहराकर किसी स्थान विशेष पर समयानुसार हो रहे परिवर्तनों को बारीकी से अध्ययन किया जा सकता है । वर्तमान आईआरएस उपग्रह किसी विशेष स्थान पर लगभग प्रत्येक 3 सप्ताह की बात गुजरता है इस प्रणाली के तहत प्रक्षेपित किए गए उपग्रह हैं-
I.R.S-1A, I.R.S-1B, I.R.S-1E, I.R.S-1C, कार्टोसैट-1, etc.
मैटसैट:
भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम के तहत भारतीय अंतरिक्ष संगठन (ISRO) ने 12 सितंबर 2002 को श्रीहरिकोटा (आंध्र प्रदेश) के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण यान-सी 4 (Polar Satellite Launch Vehicle - PSLV-C4) के माध्यम से देश के पहले मौसम संबंधी विशिष्ट उपग्रह 'मैटसैट' (METASAT) खूब भूस्थैतिक स्थांतरण कक्षा (Geostationary Transfer Orbit - GTO) में सफलतापूर्वक स्थापित किया।
यह पहला मौका था जब किसी भारतीय अंतरिक्ष यान ने 1000 की ग्रह से अधिक भार के उपग्रह को भूस्थैतिक कक्षा (भूस्थैतिक कक्षा से तात्पर्य है कि जिस गति से पृथ्वी घूमती है उसी कोणीय गति से उपग्रह भी घूमेगा जिसके कारण उपग्रह सदा पृथ्वी की एक विशेष स्थान के ऊपर स्थित नजर आएगाl में स्थापित किया।