भारतीय प्रतिभूति एवं विनियम बोर्ड ( सेबी )

एक गैर- सांविधिक संस्था के रूप में 12 अप्रैल, 1988 को भारतीय प्रतिभूति एवं विनियम बोर्ड( सेबी )की स्थापना की गई। 30 जनवरी 1922 को एक अध्यादेश के द्वारा इसे वैधानिक दर्जा भी प्रदान किया गया। सेबी का प्रबंध 6 सदस्यों द्वारा किया जाता है, जिनमें एक चेयरमैन होता है जो केंद्र सरकार द्वारा नामित होता है। 2 सदस्य केंद्रीय मंत्रालय के अधिकारियों में से जिन्हें वित्त एवं कानून की जानकारी होती है तथा एक सदस्य भारतीय रिजर्व बैंक के अधिकारियों में से होता है। शेष दो सदस्यों का नामांकन केंद्र सरकार द्वारा किया जाता है।

सेबी के कार्य- सेबी की स्थापना से भारतीय शेयर बाजार की कार्य-प्रणाली में काफी अधिक पारदर्शिता आ गई है। सेबी के निम्नलिखित प्रमुख कार्य हैं-

* प्रतिभूति बाजार में निवेशकों के हितों की रक्षा करना तथा प्रतिभूत बाजार को उचित उपायों के माध्यम से विकसित करना एवं नियमित करना।

* स्टॉक एक्सचेंजों तथा किसी भी अन्य प्रतिभूति बाजार के व्यवसाय का नियमन करना।

* स्वयं नियमित संगठनों को प्रोत्साहित करना।

* प्रतिभूतियों के बाजार से जुड़े हुए लोगों को प्रशिक्षित करना तथा निवेशकों की शिक्षा को प्रोत्साहित करना।

विनियामक परिवर्तन

* सेबी विनियम 2009 में अन्य बातों के अलावा सूचीबद्ध कंपनियों द्वारा बिक्री के लिए पेशकश की व्यवस्था की गई है तथा यह अनुबंधित किया गया है कि सार्वजनिक निर्गम हमें आवंटन/प्रतीदायअवधि 15 दिन की होगी तथा सभी प्रकार के निर्गम कर्ताओं के लिए निर्गम अवधि 10 दिन की है। 

* 10 जून 2009 को अधिसूचित सेबी अधिनियम 2009 में किसी कंपनी के इक्विटी शेरों के स्वैक्षिक तथा अनिवार्य असूचियान तथा असूचीबद्ध किए गए इक्विटी शेयरों के सूचनीय के लिए एक प्रक्रम की व्यवस्था की गई है।

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