1- भारत में भावी संविधान का स्वरूप संघात्मक होना चाहिए, जिससे अवशिष्ट शक्तियां प्रांत के पास होनी चाहिए।
2- सभी प्रांतों को एक समान स्वायतता प्रदान की जाए।
3- सभी प्रांतीय विधानसभाओं और अन्य संस्थाओं में अल्पसंख्यक समुदाय को पर्याप्त प्रतिनधित्व दिया जाए।
4- केंद्रीय विधान मण्डल में मुसलमानों को कम से कम एक तिहाई स्थान प्रदान किए जाने चाहिए।
5- अल्पसंख्यक वर्गो के लिए पृथक निर्वाचन प्रणाली के आधार पर ही प्रतिनिधत्व प्रदान किया जाना चाहिए।
6- किसी भी प्रांत के विभाजन से पंजाब, बंगाल व पश्चिमोत्तर सीमा प्रांतों में मुसलमानों के बहुमत पर प्रभाव नहीं पड़ना चाहिए।
7- सभी सम्प्रदाय वालों को अपने धार्मिक विश्वास, उपासना, त्योहार, प्रचार, सम्मेलन तथा शिक्षा की पूर्ण स्वाधीनता होनी चाहिए।
8- यदि कोई भी सम्प्रदाय या वर्ग किसी भी विधेयक पर तीन चौथाई मत द्वारा अपना विरोध प्रकट करे, तो उसे नहीं पास होना चाहिए।
9- सिंध को मुंबई प्रांत से अलग कर देना चाहिए।
10- सीमांत और बलूचिस्तान प्रांतों में सुधार किए जाने चाहिए
11- सभी सरकारी सेवाओं में मुसलमानों को उचित आरक्षण मिलना चाहिए।
12- मुस्लिमो को उनकी संस्कृति, शिक्षा, भाषा, धर्म और वैयक्तिक कानूनों की सुरक्षा के लिए पर्याप्त संरक्षण मिले।
13- केंद्रीय अथवा प्रांतीय मंत्रिमंडल में कम से कम एक तिहाई मंत्री मुसलमान होने चाहिए।
14- केंद्रीय विधान मण्डल को संविधान में परिवर्तन का अधिकार तभी हो, जब संघ की इकाइयां उसे स्वीकार कर ले ।