बैंकिंग क्षेत्र में सुधार के लिए अधिनियम

सरकार ने बैंकिंग क्षेत्र में सुधार के लिए वर्ष 2005 में ' बैंकिंग कंपनीज ' ( अधिग्रहण एवं उपक्रमों का हस्तांतरण ) और फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशन लॉज           ( संशोधन ) विधेयक लाया है। इसमें बताया गया है कि 19 राष्ट्रीयकृत बैंकों में से सरकार की धारिता 51 से 70% तथा शेष 4 बैंकों में 100% धारिता होगी। इस विधेयक का मुख्य उद्देश्य बैंकों में स्वायत्त तथा पारदर्शिता को लाना है।

अभिलक्षण

* सरकार की धारिता को 51 से 33% करने के प्रस्तावों को छोड़ दिया है।

* विधेयक केंद्र सरकार को किसी भी राष्ट्रीयकृत बैंक के निदेशक मंडल को विसपित करने की शक्ति प्रदान करता है और वित्तीय पुनर्निर्माण प्राधिकरण की स्थापना करने तथा ऐसे बैंकों के मुख्य कार्यपालक अधिकारी की नियुक्ति करने का अधिकार देता है।

* निर्गत पूंजी के आधार पर पूर्व में प्रचलित छ में से सिर्फ एक निदेशक सदस्य की नियुक्ति के स्थान पर अब निदेशक मंडल में 1 से 3 अंश धारी निदेशकों की नियुक्ति की बात करता है, जिसमें बोर्ड में समान प्रतिनिधित्व प्राप्त हो सके।

* विधेयक केंद्रीय बैंक को 1 या उससे अधिक अतिरिक्त निदेशकों की नियुक्ति का अधिकार देता है।

* विधेयक अंश धारियों को पी.एस.बी के निदेशक खातों, वार्षिक खातों तथा बैलेंस - शीट प्राप्त करने का अधिकार प्रदान करता है।

* यह विधेयक अनौपचारिक निवेशकों के कार्यकाल खत्म होने के पश्चात पद छोड़ने संबंधी आवश्यक संसाधनों की बात करता है (यदि उनके पद पर कोई नई नियुक्ति नहीं हुई है तो भी उन्हें अपना पद छोड़ना पड़ेगा)।

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