1905 ई. की क्रांति

                     1905 ई. की क्रांति

रूस मे 1905 ई. में एक क्रांति हुई थी, जिसके द्वारा रूस में वैधानिक राजतंत्र की स्थापना करने का प्रयास किया गया था किन्तु पारस्परिक झगड़ों के कारण यह क्रांति सफल नहीं हो सकी और शासन पर पुनः जार का आधिपत्य स्थापित हो गया। इस क्रांति का स्पष्ट परिणाम यह हुआ कि उसने रूस की साधारण जनता को राजनीतिक अधिकारों का परिचय करा दिया था। उनको ज्ञात हो गया कि मत (वोट) का क्या अर्थ है? ड्यूमा या दूसरे शब्दों में पार्लियामेंट के सदस्यों का निर्वाचन किस प्रकार किया जाना चाहिये? सरकार को लोकमत के अनुसार अपनी नीति का निर्धारण कर जनहित के कार्यों को करने के लिये अग्रसर होना चाहिये। अपने राजनीतिक अधिकारों से परिचित हो जाने के कारण रूस की जनता समझ गई कि रूस में भी पूर्णतया लोकतंत्र शासन की स्थापना होनी चाहिये जहां साधारण जनता के हाथ में शासन सत्ता हो।

पश्चिमी यूरोप का प्रभाव

पश्चिमी यूरोप के लोकतंत्र राज्यों का प्रभाव भी रूस पर पड़ा, यद्यपि रूस के सम्राटों ने पाश्चात्य प्रगतिशील विचारों का रूस में प्रचार रोकने के लिये विशेष रूप से प्रयत्न किया, किन्तु विचारों का रोकना बहुत ही कठिन कार्य है, क्योंकि विचार हवा के समान होते हैं। प्रथम विश्वयुद्ध के समय जर्मनी और उसके साथियों के विरूद्ध जो प्रचार-कार्य मित्र राष्ट्रों की ओर से किया जा रहा था, उसमें मुख्यतः यही कहा जाता था कि वे लोकतंत्र शासन, जनता की स्वतंत्रता और राष्ट्रीयता के आधार पर नवीन राष्ट्रों का निर्माण करने के अभिप्राय से युद्ध कर रहे हैं। रूस मित्र-राष्ट्रों के अंतर्गत था। अतः वहां की जनता पर भी इस प्रचार का बहुत असर पड़ा।

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