भारतीय संविधान Easy Notes - 76 (समता का अधिकार)

Day- 76      

समता का अधिकार

· भारतीय संविधान का अनुच्छेद 14-18 प्रत्येक व्यक्ति को समता का अधिकार प्रदान करता है जो कि निम्नवत है-

1. विधि के समक्ष समता अथवा विधियों का समान संरक्षण

2. धर्म, मूलवंश, जाति, लिंग, जन्म स्थान के आधार पर विभेद का प्रतिषेध (अनुच्छेद 15)

3. लोक सेवाओं के विषय में अवसर की समानता का अधिकार (अनुच्छेद 16)

4. अस्पृश्यता (छुआछूत) का अंत (अनुच्छेद 17)

5. उपाधियों का उन्मूलन (अनुच्छेद 18)

· नुच्छेद 14 में क्षमता का सामान्य नियम दिया गया है जो व्यक्तियों के बीच अयुक्तियुक्त विभेद को वर्जित करता है|

· संविधान की प्रस्तावना में परिकल्पित समता का आदर्श अनुच्छेद 14 में निहित है अनुच्छेद 15, 16, 17 और 18 अनुच्छेद 14 में निहित सामान्य नियम के विशिष्ट उदाहरण है।

· अनुच्छेद 14 उपबंधित करता है कि भारत राज्य-क्षेत्र में किसी व्यक्ति को विधि के समक्ष समता से अथवा विधियों के समान संरक्षण से राज्य द्वारा वंचित नहीं किया जाएगा।

· विधि के समक्ष समता’ शब्द को ब्रिटिश संविधान से लिया गया है। ब्रिटिश संविधान के प्रतिष्ठित लेखक ए.वी. डायसीने विधिसम्मत शासन के सिद्धांत प्रतिपादित किए थे।

· विधियों का समान संरक्षण’ वाली शब्दावली अमेरिकी संविधान से ली गई है। इस अभिव्यक्ति से अभिप्रेत होता है जो व्यक्ति सामान परिस्थितियों में है उनको एक ही विधि लागू होगी। नियम या है कि जो समान है उनके साथ समान व्यवहार होगा। इस अभिव्यक्ति को सकारात्मक संकल्पना माना जाता है।

· अनुच्छेद 14 में निहित विधि का शासन संविधान का आधारभूत ढांचा है अतः इसे अनुच्छेद 368 के अधीन संशोधन करके नष्ट नहीं किया जा सकता है।

· अनुच्छेद 14 का संरक्षण नागरिक तथा अनागरिक दोनों को प्राप्त है नैसर्गिक न्याय अनुच्छेद 14 का एक अंग है।

· अनुच्छेद 14 में निहित क्षमता का नियम आत्यान्तिक नियम नहीं है बल्कि उसके अनेक अपवाद भी हैं। उदाहरण के लिए भारत के राष्ट्रपति, प्रांतों के राज्यपाल, न्यायालयों के न्यायाधीश, विदेशी कूटनीतिज्ञ आदि को न्यायालय की अधिकारिता से विमुक्ति प्राप्त है।

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