राज्य का महाधिवक्ता (Advocate General of State)

  • अनुच्छेद 165(1) के अनुसार प्रत्येक राज्य का राज्यपाल, उच्च न्यायालय का न्यायाधीश नियुक्त होने के लिए अहित किसी व्यक्ति को राज्य का महाधिवक्ता नियुक्त करेगा ।
  • महाधिवक्ता राज्यपाल के प्रसादपर्यंत पद धारण करेगा और ऐसा पारिश्रमिक प्राप्त करेगा जो राज्यपाल उसके लिए निर्धारित करें ।
  • अनुच्छेद 165(2) के तहत महाधिवक्ता राज्य सरकार को विधि से संबंधित विषयों पर सलाह देगा तथा सौंपे गए विधिक प्रकृति के अन्य कार्य करेगा ।
  • अनुच्छेद 177 के तहत महाधिवक्ता को विधान मंडल के किसी भी सदन यह दोनों सदनों की संयुक्त बैठक तथा विधान मंडल की किसी समिति, जिसका वह सदस्य है, की कार्यवाही ओं में भाग लेने तथा बोलने का भी अधिकार दिया गया है हालांकि उसे विधानमंडल के सदनों में मत देने का अधिकार नहीं है। 
  • अनुच्छेद 194(4) के तहत विधान मंडल सदस्य को अपने कार्यकाल के दौरान प्राप्त सभी विशेषाधिकार एवं उन्मुक्तियाँ भी महाधिवक्ता को प्राप्त होती हैं । 
  • साधारण नियम यह है कि राज्य सरकार के विरुद्ध लाए गए मामलों में महाधिवक्ता सरकार की तरफ से न्यायालय में उपस्थित होता है राज्य सरकार ने जिस मामले में उसकी सलाह ली है, उसमें वह सरकार के विरुद्ध मुकदमा नहीं लड़ सकता। राज्य सरकार की अनुमति के बिना वह किसी भी आपराधिक मामले के अभियुक्तों की प्रतीरक्षा नहीं कर सकता है और न ही किसी कंपनी के निदेशक के पद पर अपनी नियुक्ति स्वीकार कर सकता है। 
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