स्वदेशी आंदोलन या बंग - भंग आंदोलन

यह आंदोलन बंगाल विभाजन के विरोध में चलाया गया था । बंगाल विभाजन का कारण लॉर्ड  कर्जन ने अविभाजित बंगाल में होने वाली प्रशासकीय दिक्कतों को बतलाया था उसका यह कहना था कि इतने विशाल क्षेत्रफल और जनसंख्या वाले किसी एक प्रांत में किसी एक प्रशासकीय केंद्र से बेहतर प्रशासन देना काफी मुश्किल भरा कार्य है। उललेखनीय है कि अविभाजित तत्कालीन बंगाल के अन्तर्गत आधुनिक बिहार, पश्चिम बंगाल, झारखंड , उड़ीसा और बांग्लादेश का क्षेत्र आता था और निश्चित रूप से इतने विशाल क्षेत्रफल और जनसंख्या वाले किसी एक प्रांत में किसी एक केन्द्र से शासन करना मुश्किल भरा कार्य था। लेकिन, बंगाल विभाजन का वास्तविक कारण उभरते राष्ट्रवाद का गढ़ बन चुके बंगाल में राष्ट्रीयता की भावनाओ को कमजोर करना था ।

          परंतु , कर्ज़न इस बात को नहीं  समझ सका कि बंगाल के विभाजन से भारत में अखिल भारतीय स्तर पर एक ऐसा तूफानी आंदोलन खड़ा हो जाएगा, जो भारतीयों को शांतिपूर्ण और संवैधानिक आंदोलन के तरीको से बाहर निकलकर आंदोलन के उग्र तरीको की ओर ले जाएगा।

बंगाल के विभाजन का प्रस्ताव 3 दिसंबर 1930 को ब्रिटिश संसद में रखा गया। सरकार ने इसकी पूरी रूपरेखा 19 जुलाई 1905 को अपने एक प्रस्ताव के रूप में आम जनता के सामने रखा, जो कलकत्ता के समाचार पत्रों में 20 जुलाई 1905 को प्रकाशित हुआ । इस पर लोगो की तीव्र प्रक्रिया आई । ब्रिटिश सरकार के इस निर्णय के प्रति विरोध प्रकट करने के लिए 7 अगस्त 1905  कलकत्ता के टाऊन हाल में कासिम बाज़ार के महाराजा मणिन्द्र चन्द्र नन्दी की अध्यक्षता में एक विशाल सभा का आयोजन किया गया। इस प्रस्ताव में कहा गया कि वर्तमान सरकार द्वारा भारतीय जनमत की अवहेलना को देखते हुए इसके प्रतिवाद स्वरूप भारतीय ब्रिटेन के कारखानों के माल का इस्तेमाल तब तक नहीं करेंगे, जब तक कि बंग भंग का प्रस्ताव वापिस नहीं लिया जाता । इस प्रकार इस प्रस्ताव के द्वारा विदेशी वस्तुओं के बहिष्कार का निर्णय लिया गया।

16 अक्टूबर 1905 को बंगाल विभाजन की घोषणा को लागू किया गया बंगाल का दो भागो में विभाजन के दिया गया। इसमें से एक भाग ' पूर्वी बंगाल एवं असम ' का था, जिसमें पूर्वी बंगाल के अतिरिक्त असम, चट्ट गांव, ढाका एवं राजशाही जिले को शामिल किया गया था, जिसकी राजधानी ढाका थी एवं जिसका प्रथम ले. गवर्नर ब्लूमफील्ड फूलर को बनाया गया।

शेष बंगाल दूसरे भाग में था , जिसकी राजधानी कलकत्ता थी और जिसका प्रथम ले. गवर्नर सर  एंड्रयू फ्रेजर को बनाया गया।

बंगाल विभाजन की घोषणा लागू होते ही स्वदेशी आंदोलन या बंग भंग या बहिष्कार आंदोलन भी प्रारम्भ हो गया। रवीन्द्रनाथ टैगोर ने इस दिन को राखी दिवस के रूप में मनाए जाने की घोषणा की। उन्होंने लिखा कि , "बंगाल इन दिनों काफी कठिन दौर से गुजर रहा है। बंगाल का विभाजन तो कर दिया गया है, परंतु भगवान ने हमें अलग नहीं किया है। यह दिन बंगालियों के एकता दिवस के रूप में देखा जाना चाहिए एवं इसके प्रतीक के रूप में पीले धागे वाली राखी बंधे। हम भाईयो को कोई अलग नहीं कर सकता।" 

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