बलबन (1266-1287)
बलबन का वास्तविक नाम बहाउद्दीन था। वह इल्तुतमिस का गुलाम था। यह अपने को अफरासियाब का वंशज कहता था।
बलबन ने शासन करने के लिए प्रसिद्ध लौह एवं रक्त की नीति का पालन किया।
इल्तुतमिश द्वारा गठित तुर्कान ए चहाल गानी का विनाश बलबन ने किया था।
बलबन दिल्ली का प्रथम सुल्तान था जिसने दरबार में गैर इस्लामी प्रथाओं का प्रचलन किया।
दिल्ली के सुल्तानों में बलबन ने ही सर्वप्रथम राजस्व के सिद्धान्त का विस्तृत विवेचना किया।
बलबन ने ही सर्वप्रथम आरिज विभाग की स्थापना किया। उसने इमाद-उल-मुल्क की दीवाने आरिज (सेनामंत्री) नियुक्त किया और उसे रावत-ए-अर्ज की उपाधि प्रदान किया।
राजदरबार में सिजदा (घुटनांे के बल झुककर अभिवादन करना) एवं पाबोस (चरण चूमना) प्रथा की शुरूआत बलबन ने की थी।
बलबन ने फारसी रीति रिवाज पर आधारित नवरोज उत्सव को आरम्भ करवाया।
नारिसरूद्दीन महमूद ने बलबन को उलूग खाँ की उपाधि से विभूषित किया था।
बलबन के दरबार में फारसी के प्रसिद्व कवि अमीर खुसरों और अमीर हसन देहलवी रहते थे।
गुलाम वंश का अंतिम शासक कैकुबाद था।