भारत में आधुनिक शिक्षा के विकास का इतिहास भारत में अंग्रेज़ो के आगमन और उसके एक राजनैतिक सत्ता बनने के बाद ही प्रारम्भ होता है।1787 में वारेन हेस्टिंग्स ने कलकत्ता में मदरसा स्थापित किया, जिसमें फारसी तथा अरबी भाषा का अध्ययन कराया जाता था । 1791 में बनारस के ब्रिटिश रेजिडेंट श्री जोनाथन डंकन के प्रयास के फलस्वरूप एक संस्कृ कालेज खोला गया , जिसका उददेश्य हिन्दू धर्म एवं साहित्य और कानून का अध्ययन करना था ।
1799 में लॉर्ड वेलेजली ने कम्पनी के असैनिक अधिकारियों कि शिक्षा के लिए कलकत्ता में फोर्ट विलियम कॉलेज की स्थापना की। परंतु, यह कालेज 1802 में डायरेक्टरों की आज्ञा पर बन्द कर दिया गया। वास्तव में, अंग्रेज़ो ने भारत में शिक्षा के विकास के लिए वास्तविक प्रयत्न 1813 के चार्टर एक्ट से प्रारम्भ किया ।
चार्टर एक्ट, 1813:-
1813 के चार्टर एक्ट में भारतीय शिक्षा पर एक लाख रुपया खर्च किए जानेे की बात की गई , जिसे इस प्रकार खर्च किया जाना था
1- साहित्य के पुनरुद्धार और उन्नति के लिए।
2- भारत में स्थानीय विद्वान को प्रोत्साहन देने के लिए।
3- अंग्रेजी प्रदेश के वासियों ने विज्ञान के आरम्भ और उन्नति के लिए।
परंतु, अगले बीस वर्ष अधिक काल तक शिक्षा विकास की किसी निश्चित योजना के अभाव में यह राशि अप्रयोज्य बनी रही ।1833 के चार्टर एक्ट में एक लाख की यह धनराशि दस लाख में बदल दी गई। तत्कालीन भारतीय गवर्नर जनरल लॉर्ड बैंटिक को इस प्रश्न पर गम्भीरता विचार करना पड़ा। सरकार ने तीन संस्कृत कालेज कलकत्ता, आगरा एवं बनारस में स्थापित किए।