भारतीय संविधान Easy Notes - 77 (समता का अधिकार -2)

Day- 77

  •   अनुच्छेद 15 (1) केवल धर्म जात वर्ण लिंग जन्म स्थान अथवा इनमें से किसी आधार पर नागरिकों के विरुद्ध कोई विभेद करने से राज्य को निषिद्ध करता है।
  • अनुच्छेद 15 (2) के अनुसार केवल धर्म जाति लिंग वर्ल्ड अथवा जन्म स्थान के आधार पर नागरिकों को दुकानों, होटलों, मनोरंजन स्थानों, कुँओ, तालाबों, स्नान-घाटों, सड़कों एवं अन्य सार्वजनिक स्थानों के उपयोग के संबंध में किसी शर्त, प्रतिबंध, उत्तरदायित्व या अयोग्यता के अधीन ना होगा।
  • अनुच्छेद 15 (3) यह उपबन्धित करता है की अनुच्छेद 15 की कोई बात राज्य की स्त्रियों और बालकों के लिए कोई विशेष प्रावधान बनाने से नहीं रोकेगी।
  • अनुच्छेद 15 (4) सामाजिक एवं शिक्षात्मक दृष्टि से पिछड़े वर्गों के लिए विशेष प्रावधान करता है।
  • अनुच्छेद 15 में दिए गए अधिकार केवल नागरिकों को प्रदान किए गए हैं, विदेशियों को नहीं।
  • अनुच्छेद 16 उपबन्धित करता है कि राज्याधीन नौकरियों या पदों पर नियुक्ति के संबंध में सभी नागरिकों के लिए अवसर की समता होगी। राज्याधीन नौकरी या पद के विषय में केवल धर्म, मूलवंश, जाति, लिंग, वंशक्रम, जन्म-स्थान, निवास स्थान, के आधार पर किसी नागरिक को अपात्र नहीं समझा जाएगा और न विभेद किया जाएगा।
  • अनुच्छेद 16 (4) पिछड़ी जातियों के लिए उपबंध करता है।
  • अनुच्छेद 15 (4) एवं 16 (4) के कार्यान्वयन के लिए दो समितियां गठित की गई थीं - काका कालेकर आयोग (1953) व मंडल आयोग (1978)।
  • इंदिरा साहनी बनाम भारत संघ’ (AIR 1993 SC 477) के मामले में उच्चतम न्यायालय ने कहा की प्रोन्नति के मामले में आरक्षण नहीं हो सकता। आरक्षण के लिए या जो बाधा थी उसे हटाने के लिए संविधान (77 वां संशोधन) अधिनियम, 1995 के द्वारा अनुच्छेद 16 में एक नया खंड (4-क) अन्तःस्थापित किया गया।
  • अनुच्छेद 16 का खंड (4- क) इस प्रकार है – ‘इस अनुच्छेद की कोई बात राज्य को अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के पक्ष में, जिनका प्रतिनिधित्व राज्य की राय में राज्य के अधीन सेवाओं में पर्याप्त नहीं है, राज्य के अधीन सेवाओं में किसी वर्ग या वर्गों के पदों पर पदोन्नति के मामलों में आरक्षण के लिए उपबंध करने से निवारित नहीं करेगी।

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