भारतीय संविधान Easy Notes - 78 (समता का अधिकार -3)

Day- 78

  • संविधान 77 वां संशोधन अधिनियम 1995 का प्रभाव यह है-

                 1.      अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के पक्ष में सरकारी नौकरियों में प्रोन्नति में आरक्षण किया जा सकता है।

                  2.      राज्य आरक्षण के लिए उपबंध कर सकेगा अर्थात् राज्य निर्धारित करेगा कि आरक्षण कितना होगा और कैसा होगा।

                  3.      राज्य को आरक्षण करने से पहले यह राय बनानी होगी कि ऐसी जाति या जनजाति का पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं है।

  • संविधान (81 वां संशोधन) अधिनियम, 2000 के द्वारा एक नया खंड अनुच्छेद 16 खंड (4-ख) अन्तःस्थापित किया गया जिसके द्वारा मंडल वाले मामले में न्यायालय द्वारा घोषित इस नियम को अकृत किया गया है कि आरक्षित प्रवर्ग के लिए जो रिक्त स्थान बकाया है और जो किसी कारण से इसी पूर्ववर्ती वर्ष में भरे नहीं जा सकते हैं उनको भी 50% की अधिकतम सीमा लागू होगी।
  • अनुच्छेद 17 अस्पृश्यता (छुआछूत) को समाप्त करता है और उसका किसी भी रूप में पालन करने का निषेध करता है। यह अस्पृश्यता से उत्पन्न किसी अयोग्यता को लागू करने को दंडनीय अपराध घोषित करता है। अस्पृश्यता का अंत करने के लिए कानून बनाने का अधिकार संसद को अनुच्छेद 35 में दिया गया है।
  •  संसद में इस अधिकार के प्रयोग में अस्पृश्यता निवारण हेतु अस्पृश्यता अपराध अधिनियम, 1955’ अधिनियमित किया था। 1976 में इसे और कठोर बनाया गया और इसका नाम परिवर्तित करके इसे नया नाम सिविल अधिकार संरक्षण अधिनियम, 1955’ दिया गया।
  • अनुच्छेद 18 राज्य के किसी व्यक्ति को चाहे वह नागरिक हो या विदेशी, को उपाधियां प्रदान करने से मना करता है। इस प्रकार या अनुच्छेद भारत में ब्रिटिश शासन काल में प्रचलित सामंतशाही परंपरा का अंत करता है। किंतु अनुच्छेद 18 से नाभा विद्या संबंधी उपाधियां को प्रदान करने की अनुमति देता है क्योंकि उसने व्यक्तियों में देश की सैनिक शक्ति को मजबूत करने तथा देश की प्रगति के लिए आवश्यक वैज्ञानिक विकास करने का प्रोत्साहन मिलता है।
  • 1954 में भारत सरकार में अलंकरण सम्मान प्रारंभ किए जिसमें एक मेडल और एक प्रमाण-पत्र दिया जाता है इनके चार वर्ग हैं भारत रत्न. पद्म विभूषण, पद्म भूषण और पद्म श्री।
  • मोरारजी देसाई ने अपने प्रधानमंत्री काल में (1977 से 1979) सभी अलंकरण समाप्त कर दिए। इन पुरस्कारों की विधि मान्यता पर बालाजी राघवन बनाम भारत संघ (1996) 1 सु. को. के. 361 में विचार हुआ।

अभी शेष है...

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