वर्तमान विश्व में वैश्वीकरण को लेकर विभिन्न प्रकार की बहस चल रही है जिसमें मुख्य रूप से अमेरिका और चीन शामिल है जहां अमेरिका पर वैश्वीकरण से पीछे हटने के आरोप लग रहे हैं उसी प्रकार चीन की , साम्राज्यवादी और असंतुलित नीति के लिए आलोचना की जा रही है।
90 के दशक में जिन देशों ने वैश्वीकरण को अपनाने के लिए विश्व के देशों से अपील की, वही देश आज वैश्वीकरण से संरक्षण वादी निति की ओर बढ़ रहे हैं जिनमें इंग्लैंड अमेरिका प्रमुख देश है। इंग्लैंड में तो इस संरक्षणवादी नीति के पक्ष में ब्रेजिक्ट तक हो चुका है जबकि अमेरिका में इस नीति ने सत्ता परिवर्तन का काम किया है जिसके कारण वर्तमान राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का चयन अमेरिकी जनता ने राष्ट्रपति के रूप में किया है।
वर्तमान की परिस्थितियों को देखते हुए यह विचार उत्पन्न होता है कि आखिर क्यों वैश्वीकरण का समर्थन करने वाले देश, संरक्षण वादी नीति का समर्थन किसी ना किसी प्रकार से कर रहे हैं ऐसा क्यों हो रहा है?
यदि वर्तमान के वैश्वीकरण में कोई समस्या अर्थात कमी उत्पन्न भी हो गई है तो क्या संरक्षण वाद ही इसका एकमात्र विकल्प है?
सूक्ष्म अवलोकन करने पर यह ज्ञात होता है की क्रिया और प्रतिक्रिया में प्रत्येक देश इस संरक्षण वाद की ओर अग्रसर हैं। जिसमें अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के वाद विवाद ने आग में घी का काम किया है।
वैश्वीकरण से तात्पर्य एक ऐसी स्वतंत्र व्यापार व्यवस्था जिसमें बिना किसी भेदभाव के वस्तुओं एवं सेवाओं का स्वतंत्र प्रवाह होता है जबकि संरक्षण वाद इसके विपरीत है।
90 के दशक के बाद विभिन्न रूपों में वैश्वीकरण का प्रसार हुआ जिसमें कई प्रकार के क्षेत्रीय संगठनों ने जन्म लिया जहां पर मुक्त व्यापार को बढ़ावा दिया गया है जैसे यूरोपीय यूनियन, आसियान आदि और वैश्विक स्तर पर विश्व व्यापार संगठन(WTO), मुक्त व्यापार को सुनिश्चित करने का प्रयास कर रहा है जिसमें प्रत्येक सदस्य देश अपनी समस्याओं और आवश्यकताओं के अनुसार अपने विचार साझा करता है।