जीव विज्ञान - कोशिका : कोशिका की संरचना Part - 2

C.     कोशिका द्रव्य (Cytoplasm)

               कोशिका के अंदर केंद्रक को घेरे हुए एक पारभासी चिपचिपा द्रव्य भरा रहता है। इसे कोशिका द्रव्य कहते हैं। यह रंगहीन, काणिकामय में होता है। यह एंजाइम गतिविधियों का केंद्र है। यह तंतु निर्माण में भाग लेता है। औसतन पूरे केंद्रक में 70% प्रोटीन, 10% D.N.A. में 3%- 5% फास्फोलिपिड और 2-3 प्रतिशत आर.एन.ए. होता है| इसके अतिरिक्त अनेक सजीव रचनाएं पाई जाती हैं जिन्हें कोशिकांग कहते हैं|

D.    कोशिकांग (Cell Organelles)

           अंतर द्रव्य जालिका दोहरी झिल्ली से घिरी ना लिक आओ का यह एक विस्तृत जाल होता है जो पूरे जीव द्रव्य में फैला रहता है एक और एक केंद्रक कला से वह दूसरी और कोशिका कला से संबंध होता है इस जालिका के कुछ भागों पर किनारे किनारे छोटी-छोटी कणिकाएं लगी होती है जिन्हें राइबोसोम कहते हैं इनकी वजह से जालिका के ए भाग खुर्द अरे नजर आते हैं इस प्रकार दो प्रकार की अंतर द्रव्य जालिका है पाई जाती हैं :

i.  रूक्ष या खुरदरी अन्तर्द्रव्यी जालिका (RER) -  जिनकी बाहरी सतह पर राइबोसोम लगे रहते हैं| वे कोशिकाएं, जिनमें प्रोटीन संश्लेषण, आदि होता है, उनमें RER की मात्रा काफी अधिक होती है।

ii.   चिकनी अन्तर्द्रव्यी जालिका (SER) - जिन पर राइबोसोम नहीं होते हैं| अन्तर्द्रव्यी जालिका का प्रमुख कार्य उन सभी वसाओं व प्रोटीनों का संश्लेषण करना है जो कि विभिन्न कलाओं जैसे कोशिका कला, केंद्रक कला, आदि का निर्माण करते हैं।

      राइबोसोम – ये अत्यंत सूक्ष्म कण होते हैं। इनमें से कुछ तो कोशिका-द्रव्य में  तैरते रहते हैं। इनकी काफी संख्या अन्तर्द्रव्यी जालिका की नलिकाओं पर लगी रहती है। ये राइबोन्यूक्लिक ऐसिड (RNA) नामक अम्ल व प्रोटीन की बनी होती हैं। ये प्रोटीन संश्लेषण के लिए उपयुक्त स्थान प्रदान करती हैं। हम कह सकते हैं कि ये प्रोटीन का उत्पादन स्थल या प्रोटीन की फैक्ट्री भी कहते हैं।

     माइटोकॉण्ड्रिया - ये कोशिका द्रव्य में पाई जाने वाली अनेक गोलाकार अथवा सूत्राकार रचनाएं होती है। इनकी औसत लंबाई 3-5 mµ (मिली माइक्रोन : 1 mµ = 10-6 = 10-3 mµ) तथा औसत व्यास 0.2 से 2 mµ तक होता है।

         माइटोकॉण्ड्रिया दोहरी झिल्ली के आवरण से घिरी हुई रचनाएं होती है। बाहरी झिल्ली सपाट होती है परंतु भीतरी झिल्ली अंदर की ओर अनेक अंगुली की तरह उभार बनाती हैं। इन उभारों को क्रिस्टी कहते हैं। क्रिस्टी की सतह पर अनेक टेनिस रैकेट के समान छोटे-छोटे कण लगे होते हैं। जिन्हें ऑक्सीसोम कहते हैं।

         ऊर्जा-युक्त कार्बनिक पदार्थों का ऑक्सीकरण माइटोकॉण्ड्रिया में होता है जिससे काफी मात्रा में ऊर्जा प्राप्त होती है। इसलिए माइटोकॉण्ड्रिया को कोशिका का बिजली घर कहते हैं। विभिन्न जीवों में माइटोकॉण्ड्रिया की संख्या भिन्न-भिन्न होती है। एक ही जीव की विभिन्न कोशिकाओं में इसकी संख्या में अंतर मिलता है। इनकी संख्या कोशिकाओं की सक्रियता पर निर्भर करती है। कीटों के उड़न पेशियों में सर्वाधिक माइटोकॉण्ड्रिया होते है। मनुष्य की एक सामान्य यकृत कोशिका में 1000 से लेकर 1600 तक माइटोकॉण्ड्रिया पाए जाते हैं।

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