विश्व के देश भिन्न - भिन्न प्रकार से प्रत्यक्ष -अप्रत्यक्ष तरीके से संरक्षण वाद में संलग्न रहते हैं जैसे अमेरिका अपने द्वारा उठाए गए कदमों को संरक्षण वाद से परे मानता है।
संरक्षण के संबंध में कई तरीके देशों द्वारा भिन्न - भिन्न तरीके अपनाए जाते हैं, जैसे - आयात शुल्क में वृद्धि करना, आयात शुल्क में वृद्धि से विदेशी सामान की कीमत बढ़ जाती है जिससे घरेलू वस्तुओं की तुलना में वह सामान महंगा हो जाता है और प्रतिस्पर्धा का स्तर कम हो जाता है जिससे घरेलू उद्योगों को लाभ होता है।
संरक्षण के दूसरे तरीके में कोटा निर्धारण का प्रयोग किया जाता है अर्थात सरकार द्वारा आयातित वस्तुओं की मात्रा निर्धारित कर दी जाती है इस मात्रा से ऊपर उस वस्तु का आयात संबंधित देश में नहीं किया जा सकता है और इससे घरेलू उद्योगों को लाभ प्राप्त होता है।
संरक्षण के तीसरे तरीके के रूप में घरेलू उद्योगों को सब्सिडी प्रदान की जाती है अर्थात घरेलू उद्योगों को आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है जिससे घरेलू वस्तुओं की कीमत विदेशी वस्तुओं की तुलना में कम हो जाती है और घरेलू उद्योगों को लाभ प्राप्त होता है क्योंकि इससे प्रतिस्पर्धा का स्तर कम हो जाता है।
संरक्षण का एक चौथा तरीका भी है जिसके तहत किसी भी देश द्वारा अपनी स्वदेशी मुद्रा का विदेशी मुद्रा की तुलना में अवमूल्यन कर दिया जाता है अर्थात देश की मुद्रा का मूल्य कम कर दिया जाता है और इससे आयातित वस्तुएं मँहगी हो जाती है जिससे घरेलू उद्योगों को लाभ प्राप्त होता है।
इस प्रकार लगभग सभी देश घरेलू उद्योगों को संरक्षण देने के लिए किसी ना किसी प्रकार के नियमों के तहत प्रतिबंधों का प्रयोग करते रहते हैं और सभी देश क्रिया प्रतिक्रिया में लिप्त होते जाते हैं और परिणाम स्वरूप व्यापार युद्ध का जन्म होता है वर्तमान में चीन और अमेरिका के बीच ऐसी स्थिति उत्पन्न हो रही है।