देश में 'निजता के अधिकार 'पर बहस हर वर्ष 1950 से जारी है ।वर्ष 1954 में एम.पी शर्मा बनाम सतीश चंद्र (जिलाधिकारी दिल्ली) में सर्वोच्च न्यायालय के 8 न्यायाधीशों की पीठ ने निर्णय दिया था कि निजता का अधिकार जैसे संविधान में कुछ नहीं है। इसी प्रकार वर्ष 1962 में खड़क सिंह बनाम उ.प्र. सरकार बाद में सर्वोच्च न्यायालय के 6 न्यायाधीशों की पीठ ने भी ऐसा ही निर्णय दिया था ।हाल ही में सर्वोच्च न्यायालय के 9 सदस्य संविधान पीठ द्वारा दिए गए निर्णय में पूर्ववर्ती निर्णय के विपरीत निजता के अधिकार को मौलिक अधिकार माना है।
स्मरणीय तथ्य:-
- 24 अगस्त 2017 को सर्वोच्च न्यायालय की 9 सदस्य संविधान पीठ ने 'निजता का अधिकार' मामले पर निर्णय देते हुए इसे मौलिक अधिकार माना है।
- निर्णय के अनुसार 'निजता का अधिकार' अनुच्छेद 21 के 'जीवन और स्वतंत्रता के अधिकार' का अंतभूर्थ अंग है।
- 'निजता का अधिकार' भारतीय संविधान के भाग 3 के अंतर्गत निहित विभिन्न मूलभूत स्वतंत्रताओं के तहत स्वभावतः संरक्षित है।
- मुख्य न्यायाधीश जेएस खेहर की अध्यक्षता वाली 9 सदस्यीय पीठ में शामिल न्यायाधीशों में न्यायधीश जे. चेलामेश्वर, एस.ए बोब्डे, आर.के अग्रवाल, रोहिंटन एफ. नरीमन, अभय मनोहर सप्रे, डी.वाई. चंद्रचूड़ ,संजय किशन कौल और एस. अब्दुल नजीर शामिल है।
- इससे पूर्व 18 जुलाई 2017 को मुख्य न्यायाधीश जे.एस खेहर की अध्यक्षता वाली पांच सदस्य संवैधानिक पीठ ने 'निजता के अधिकार' मौलिक अधिकार है या नहीं, मामले को सुनवाई के लिए 9 सदस्य संवैधानिक पीठ को सौंप दिया था ।
- उल्लेखनीय है कि निजता का अधिकार मामले की सुनवाई के लिए सर्वप्रथम पांच सदस्यीय संवैधानिक पीठ गठित की गई थी किंतु केंद्र सरकार द्वारा पूर्ववर्ती 8 सदस्यीय और 6 सदस्यीय का हवाला देने पर इस मामले को 9 सदस्यीय संवैधानिक पीठ को सौंप दिया गया था ।
- पीठ द्वारा इस मामले पर 19 जुलाई से लेकर 2 अगस्त 2017 तक सुनवाई की गई थी।
- ध्तातव्य है कि निजता के उल्लंघन को लेकर वर्ष 2012 में सर्वोच्च न्यायालय में 'आधार' के खिलाफ विभिन्न याचिकाएं दाखिल की गई थीं।
- हालांकि केंद्र सरकार ने निजताा के अधिकार को एक सामान्य कानूनी अधिकार बताया था।
- सरकार का दावा है की आधार ,सार्वजनिक वितरण में भ्रष्टाचार मनी लांड्रिंग(Money Laundering ) और आतंकवाद के वित्त पोषण को समाप्त करने का एक उपाय है ।
- सर्वोच्च न्यायालय द्वारा सरकार से पूछा गया थाा कि क्या वह एक 'मजबूत डाटा संरक्षण तंत्र' (Robust Data Protection Mechanism) स्थापित करनेे की योजना बना रही है ।
- सरकार द्वारा पीठ को यह सूचना प्रदान की गई कि 31 जुलाई 2017 को सर्वोच्चच न्यायालय के पूर्व न्यायधीश बी .एन. श्रीकृष्ण की अध्यक्षता मी विशेषज्ञों की समिति गठित कर दी गई है, जो कि महत्वपूर्ण डाटा संरक्षण मुद्दोंं की पहचान करते हुए एक डांटा संरक्षण विधेयक(Data Protection Bill)के मसौदे के संबंध में सुझाव देेती।