कुमार गुप्त के बाद स्कंदगुप्त क्रमादित्य नामक शासक हुआ। इसके समय की घटनाओं की जानकारी उसके जूनागढ़ अथवा गिरनार तथा भीतरी स्तंभ लेख से प्राप्त होती है। स्कंद गुप्त के काल में ही मध्य एशियाई एक बर्बर जाति हूणो का आक्रमण हुआ स्कंद गुप्त ने 466 ईसवी में चीनी सांग सम्राट के दरबार में अपने राजदूत भेजे थे स्कंद गुप्त ने शक्र आदित्य की उपाधि धारण की थी उसकी दूसरी राजधानी अयोध्या थी।
हूणो, खानाबदोश जंगलियों का एक समूह था। वह मंगोल जाति के थे जो सिथियनो की एक शाखा थी ।वह लोग पूर्णतया असभ्य और बर्बर थे तथा युद्ध से उनका बड़ा प्रेम था। लूटमार करना उनका पेशा तथा सैनिक जीवन बिताने में भी गौरव का अनुभव करते थे ।आरंभ में चीन के पड़ोस में रहते थे। और पश्चिम की ओर बढ़े और दो भागों में विभक्त हो गए जो हूँणो थे यूरोप गए काले कहलाए और उनका सबसे महान नेता एंटीला था। जो और इरान और भारत में रहने लगे वे श्वेत हूण कहलाए। चीनी यात्री सुंग यून जिसने 515-20 ई के बीच भारत यात्रा की थी तो अपने सम सामयिक हुड शासक केेेे विषय में लिखा है कि उनका वंंंंश दो पीढ़ियों से गांधार प्रशासन कर रहा है।