गुप्त काल अपनी मूर्ति कला शैली के लिए भी काफी प्रसिद्ध रहा है। कहा जाता है कि हिंद यूनानी यों के द्वारा जन्म दिए गए तथा कुषाणों के द्वारा पल्लवित और पुष्पित मथुरा कला शैली ने ही बाद में जाकर गुप्त मूर्ति कला शैली को जन्म दिया। परंतु मथुरा और गुप्त मूर्ति कला शैली में कुछ मूलभूत अंतर दृष्टिगोचर होते हैं ।मथुरा मूर्तिकला शैली में मूर्तियों को सुंदर बनाने के लिए जिस नग्नता का प्रदर्शन हुआ है ।गुप्त कला शैली में ऐसी नग्नता नहीं पाई जाती। गुप्तकालीन मूर्तिकार ने अपनी मूर्तियों में मोटे और उत्तरी वस्त्रों का प्रदर्शन किया इसके अलावा एक तरफ जहां कुषाण कालीन मूर्तियों ने प्रभा मंडल सादगी लिए हुए हैं वहीं गुप्तकाल में सुसज्जित प्रभा मंडल बनाए गए हैं।
गुप्तकालीन मूर्तिकला के केंद्र मथुरा सारनाथ और पाटिल पुत्र थे। जहां बौद्ध और अन्य धर्मों से संबंधित देवी देवताओं की प्रतिमाओं का प्रदर्शन हुआ है ।गुप्तकाल में महात्मा बुद्ध की विभिन्न मुद्राओं में धातु पाषाण मूर्तियों का निर्माण हुआ। धातु की मूर्तियों में सर्वाधिक प्रसिद्ध मूर्ति बिहार के भागलपुर जिले में स्थित सुल्तानगंज नामक स्थान से प्राप्त हुए हैं। जो कि 7:30 फीट ऊंची कहां से की बनी बुद्ध प्रतिमा है। इस मूर्ति को वर्तमान में लंदन के बर्किंघम कला में रखा गया है। बुद्ध की मूर्तियां बैठी हो खड़ी हुई मुद्रा में बनाई गई हैं बुद्ध की बैठी हुई मूर्तियां कई मुद्रा में बनाई गई हैं।