खारवेल कलिंग शासक

प्राचीन कलिंग में आधुनिक उड़ीसा प्रदेश के पूर्वी तथा गंजाम जिले के अतिरिक्त उनके कुछ समीपवर्ती प्रदेश भी सम्मिलित थे। अशोक की मृत्यु के बाद कलिंग का इतिहास अंधकार युक्त हो जाता है प्रतीत होता है। कि अशोक की आंखें बंद होते ही कलिंग स्वतंत्र हो गया और यहां एक नए वंश का उदय हुआ जिसे चेदि वंश या महामेघ वाहन वंश कहते हैं।

मौर्य साम्राज्य के पतन ओं परंतु भारत में जिन कुछ राज्यों का उदय हुआ उनमें खारवेल काफी प्रसिद्ध हुआ ।एक गणना के द्वारा कहा गया कि खारवेल का राज्य रोहण 176 ईसवी पूर्व में हुआ ।उसने अपने राज्य काल के 13 वें वर्ष में हाथी गुफा अभिलेख जारी किया परंतु आधुनिक सौदों के आधार पर यह माना जाता है कि खारवेल का उदय ईसा पूर्व पहली सदी के मध्य हुआ ।डॉक्टर सरकार के अनुसार खारवेल क्षार तथा वेल जैसे 2 शब्दों के मेल से बना है जिसका तात्पर्य होता समुद्री तट पर शासन करने वाला।

अभिलेख में कहा गया है कि 24 वर्ष की आयु पूर्ण करने के पश्चात खारवेल का कलिंग के शासक के रूप में अभिषेक हुआ। अपने शासनकाल के 11 वर्ष में खारवेल ने दक्षिण भारत पर आक्रमण कर वहां के एक राज्य की राजधानी को जीतकर वहां गधों का हल चलवा दिया।

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