बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ

बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ योजना महिला एवं बाल विकास मंत्रालय स्वास्थ्य मंत्रालय मानव संसाधन विकास मंत्रालय और परिवार कल्याण मंत्रालय की एक संयुक्त पहल है यह अभी सरित प्रयासों के अंतर्गत बालिकाओं को संरक्षण देने उनको सशक्त करने के लिए एक बहुउद्देशीय परियोजना है।

इस योजना का उद्देश्य पक्षपाती लिंग चुनाव की प्रक्रिया का उन्मूलन बालिकाओं का अस्तित्व और सुरक्षा सुनिश्चित करना बालिकाओं की शिक्षा सुनिश्चित करना है। भारत में 2001 की जनगणना में 0 से 6 वर्ष के बच्चों का लिंग अनुपात का आंकड़ा 1000 लड़कों के अनुपात में लड़कियों की संख्या 927 थी जो कि 2011 की जनगणना में घटकर 1000 लड़कों के अनुपात में 918 रह  गई।

इस लिंग अनुपात में असमानता मानव के अस्तित्व के समाप्ति का संकेत है इस गंभीर समस्या पर काबू पाने के लिए इस योजना का गठन किया गया।

बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ योजना की शुरुआत 22 जनवरी 2015 को की गई ।इस योजना का प्रारंभ हरियाणा के पानीपत नामक स्थान पर किया गया।जिससे निम्न लिंग अनुपात वाले 100 जिलों में प्रारंभ किया गया ।

इस योजना के तहत बालिका और शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए सामाजिक आंदोलन और सामान मूल्यों को बढ़ावा देने के लिए जागरूकता अभियान का कार्यान्वयन किया जाएगा और इस मुद्दे को सार्वजनिक विचार-विमर्श का विषय बनाया जाएगा और उसे संशोधित करते रहना सुशासन का पैमाना बनेगा निर्णय लिंगानुपात वाले जिलों की पहचान कर ध्यान देते हुए गहन एकीकृत कार्यवाही की जाएगी।

देशव्यापी अभियान बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ शुरू करने के साथ यह कार्यक्रम प्रारंभ होगा जिसमें बालिका के जन्म को जश्न के रूप में मनाने के साथ उसे शिक्षा ग्रहण करने में सक्षम बनाया जाएगा अभियान का उद्देश्य लड़कियों का जन्म पोषण और शिक्षा बिना किसी भेदभाव के हो और समान अधिकारों के साथ से देश के सशक्त नागरिक बन सकेंबेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ योजना के अंतर्गत सुकन्या समृद्धि योजना सबसे मुख्य घटक है जिससे कन्या भ्रूण हत्या और बालिकाओं को आर्थिक मदद मिलेगी।

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