तापीय प्रतिलोमन -2

वाताग्रीय प्रतिलोमन। -

                                 जब धरातल के किसी क्षेत्र में ठंड वायु राशि एवं गर्म वायु राशि एक दूसरे से मिलने का प्रयास करती हैं तो दोनों वायु राशियों के मिलने वाले क्षेत्र को तापीय प्रतिलोमन की दशा उत्पन्न होती है क्योंकि अभिसरण क्षेत्र में ठंडी वायु राशि भारी एवं शुष्क होने के कारण नीचे बैठती है जबकि गर्म वायु ऊपर की ओर उढती है जिससे धरातल पर ठंड वायु के गर्म परत मिलती है  जिससे वाताग्रीय प्रतिलोमन की दशा उत्पन्न होती है क्योंकि इस प्रकार का प्रतिलोमन शीतोष्ण चक्रवात में घटित होता है इसलिए इसे चक्रवर्ती प्रतिलोम भी कहते हैं ।

वायुमंडलीय प्रतिलोमन -

                                    हमारा वायुमंडल भी तापीय प्रतिलोम का उदाहरण प्रस्तुत करता है जो  क्षोभ मंडल में 165 मीटर की ऊंचाई पर 1 डिग्री तापमान में कमी आती है जबकि समताप मंडल में ऊंचाई बढ़ाने के साथ तापमान में वृद्धि होती है जबकि मध्य मडल में तापमान में कमी आती है और आयन मंडल में एक बार पुनः तापमान में वृद्धि होती है इस प्रकार वायुमंडल भी तापीय प्रतिलोम का उदाहरण प्रस्तुत करता है ।

तापीय प्रतिलोमन एवं मौसमी स्थित -

                                                    धरातल में जिन क्षेत्रों में तापीय प्रतिलोऊमन की घटना घटित होती है वहां इसके लाभदायक या हानिकारक दोनों प्रकार देखने को मिलते हैं जबकि पर्वत की घाटी क्षेत्रों में तापीय प्रतिलोमन की स्थित में ऊपर की ओर ग़म एवं आद्र वायु नीचे की ढण्डी वायु का तापमान अगर हिमांग से नीचे हो तो पाला बनने लगता है और पाला  आर्थिक दृष्टिकोण से हानिकारक होता है उदाहरण के लिए कैलिफोर्निया की घाटियों में आए दिन पाला पड़ने के कारण यहां फल एवं फुल की फसलों को नुकसान पहुंचाती है स्विट्जरलैंड में पाला  से बचने के लिए फल फूल के बागान एवं  होटल घाटी के ऊपर भागों में लगाए जाते हैं

                  महासागरों के सतर पर जहां पर गर्म एवं ठंडी जल धाराएं का अभिसरण होता है वहां पर कोहरे का निर्माण होता है यह कोहरा आर्थिक दृष्टिकोण से हानि कारक एवं लाभदायक दोनों ही होता है क्लेकरन का अधिक विकास होता है क्लेकरन मछलियों का प्रमुख भोजन होता है यही कारण है कि गमं एवं ढण्डी  जल धाराओं के क्षेत्र में मत्स्यन  से अधिक होता है ठीक इसके विपरीत सागर के सतह  पर कोहरे का निर्माण से दृश्यता कम हो जाती है  जिससे जलयानो  के टकराने की संभावना बढ़ जाती है ।

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