ज्वार महासागरीय जल का एक प्रमुख गुण है इसके कारण महासागरो के तली से लेकर ऊपर तक के जल में गति उत्पन्न होती है चंद्रमा और सूर्य के प्रभाव से उत्पन्न तरंग को ज्वारीय तरंग करते हैं यही तरंग जब तट की ओर गमन करती हैं तो उस से निर्मित उच्च जल तल को ज्वार कहते हैं वही तरंग जब तट से हटकर पुनः महासागरों की ओर वापस लौटते हैं तो उस समय नियमित निम्न तल को भाटा करते हैं वास्तविक समुद्र तल इन दोनों के मध्य होता है
न्यूटन के गुरुत्वाकर्षण नियम के अनुसार महासागरों में ज्वार उत्पन्न करने वाला प्रमुख कारण चंद्रमा का आकर्षण शक्ति है हालांकि चंद्रमा की तुलना में सूर्य का जो आकर्षण बल कई गुना अधिक है परंतु चंद्रमा सूर्य की तुलना में पृथ्वी के काफी नजदीक है यही कारण है कि चंद्रमा का आकर्षण पर महासागरों में ज्वार उत्पन्न करने का प्रमुख कारण द्वार मुख्यतः दो प्रकार के होते हैं
1- दीर्घ ज्वार -
जब पृथ्वी चंद्रमा एवं सूर्य 3 एक सीधी रेखा में हो तो चंद्रमा एवं सूर्य का ज्वारीय आकर्षण बल सम्मिलित रूप से एक ही दिशा में कार्य करता है जिसके कारण महासागरों में दीर्घ ज्वार उत्पन्न होते हैं दीर्घ ज्वार के समय ज्वारीय तरंगों की उचाई सामान्य ज्वार की तुलना में 20 % अधिक होती है
2- लघु ज्वार -
जब चंद्रमा एवं सूर्य पृथ्वी के साथ संपूर्ण की अवस्था में होते हैं तो दोनों के आकर्षण पर एक दूसरे के आकर्षण बल से संतुलित कर देते हैं जिसके कारण महासागरों में लघु ज्वार उत्पन्न होते हैं यह स्थित प्रत्येक माह के शुल्क पक्ष एवं कृण्ण पक्ष समाप्ती एवं अष्टमी पक्ष को घटित होती है ।