ज्वार - भाटा -2

ज्वार का महत्व -

                         1- ज्वारीय तरंगे  नौसंचालन एवं मछुआरों को उनके आर्थिक क्रियाकलाप में मदद करती हैं ।

2- ज्वार के प्रभाव से तटीय  प्रदेशों में बंदरगाहो का निर्माण भी होता है जिसे ज्वारीय बंदरगाह कहते हैं जैसे - भारत के गुजरात में कांडला , पश्चिम बंगाल में हल्दिया ज्वारीय बंदरगाह के उदाहरण पाया जाते हैं टोन्स नदी के स्थित लदन बंदरगाह ज्वारीय बंदरगाह के कारण है ।

3- ज्वार के द्वारा विद्युत उत्पादन करने में सहायता मिलती है भारत में पश्चिम बंगाल के सुंदर वन क्षेत्र में दुर्गा दुवानी मे  3 मेगा वाट की ज्वारीय परियोजना लगाई गई है  ।

4- ज्वारीय तिरंगे प्रदूषित जल को बाहर ले जाने का कार्य करती हैं इस प्रकार डिसिल्टेशन  ( वन्दरगाहो के पास ) के पास ज्वारीय तरंगों का अहम योगदान होता है ।

5- विश्व की सबसे ऊंची ज्वारीय तरंग कनाडा के निकट नोवास्कोरिया फम्डी की खाड़ी में आते हैं

5- सामान्य रूप से एक स्थान पर दिन में दो बार ज्वार आते हैं लेकिन ब्रिटेन का साउथैम्यरन इसका अपवाद है जहां दिन में 4 बार ज्वार आते हैं यहां 2 बार ज्वार उत्तरी सागर से और 2 बार ज्वार इंग्लिश चैनल से आते हैं ।

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