19वीं शताब्दी के सांस्कृतिक आंदोलन में थियोसोफिकल आंदोलन का काफी महत्वपूर्ण योगदान रहा। वस्तुतः थियोसॉफिकल सोसायटी की स्थापना न्यूयॉर्क में एक रूसी महिला मैडम हेलेना पेट्रोवाना ब्लेवात्सकी एवं एक अमेरिकन सैनिक अफसर हेनरी स्टील ओल्कॉट द्वारा1857 में की गई। थियोसोफाई से आशय है धर्म संबंधी ज्ञान। थियोसॉफिकल सोसायटी के सदस्य 1879 में स्वामी दयानंद के आमंत्रण पर मुंबई आए। वे दयानंद एवं आर्य समाज के विचारों से अत्यधिक प्रभावित हुए 1882 में मद्रास के निकट अडीयार नामक स्थान पर उन्होंने इस सोसाइटी का कार्यालय स्थापित किया। बाद में यह स्थान इस सोसाइटी का अंतरराष्ट्रीय मुख्यालय बन गया। इस सोसाइटी को सक्रिय बनाने में सर्वाधिक महत्वपूर्ण योगदान एक आदर्श महिला मैडम एनी बेसेंट का रहा । वे1888 में इस सोसाइटी के सदस्य बनी। 1893 से वे भारत में इस सोसाइटी के लिए सक्रिय रूप से काम करने लगीं।
थियोसॉफिकल सोसायटी के उद्देश्य - थियोसोफिकल सोसायटी की स्थापना सभी धर्मों के तुलनात्मक अध्ययन करने के उद्देश्य की गई थी। इस सोसाइटी की धारणाएं धर्म दर्शन एवं तंत्र मंत्र के सम्मिश्रण से बनी थी। यह सोसायटी कर्म के सिद्धांत एवं आत्मा के पुनर्जन्म के सिद्धांत का समर्थन करती थी। इस सोसाइटी में प्राचीन हिंदू धर्म को अत्यधिक गूढ़ मानते हुए इसे गरिमा प्रदान की। भारत में इस सोसाइटी ने अपना मुख्य उद्देश्य धर्म के माध्यम से सामाजिक एवं सांस्कृतिक सुधार करना रखा। धार्मिक दृष्टि से सोसायटी का आंदोलन उपनिषदों से प्रभावित था।