● आर्यभट्ट ( 476 - 520 ई ॰)---ये पाटलिपुत्र पुत्र के निवासी, महान खगोलशास्त्री एवं ज्योतिषी थे ।इन्होंने 'आर्यभट्टीयम ' नामक ग्रन्थ की रचना की और सूर्यग्रहण और चंद्रग्रहण के सिद्धांत का प्रतिपादन किया । इन्होंने 'पाई' का सटीक मान निकाला तथा 'वर्गमूल' निकालने की विधि बताई ।
● वराहमिहिर --- ये चंद्रगुप्त विक्रमादित्य के नवरत्नो में से एक थे । इन्होंने चार ग्रन्थ लिखे, जिनमें ' वृहत्संहिता ' और 'पंचसिद्धान्तिका 'सर्वाधिक प्रसिद्ध हैं । इन्होंने गणितशास्त्र में दशमलव प्रणाली का आविष्कार किया ।
● ब्रह्मगुप्त ---ब्रह्मगुप्त ने सातवीं शताब्दी में ' 'ब्रह्मस्फुट सिद्धांत 'ग्रन्थ की रचना की, जो ज्योतिषशास्त्र का एक अमूल्य ग्रन्थ है । इन्होंने पहली बार ज्योतिष में बीजगणित का प्रयोग किया ।
● नागार्जुन ---ये एक उच्च कोटि के चिकित्सक और रसायनशास्त्री थे । इन्होंने रसायनशास्त्र और चिकित्साशास्त्र के क्षेत्र में नवीन खोज की। प्राचीन 'सुश्रुत 'ग्रन्थ का इन्होंनेे पुुुुनः सम्पादन किया ।
● चरक---ये सम्राट कनिष्क के राजवैद्य थे । इनके द्वारा शल्य - चिकित्सा की खोज और 'चरक -संहिता' नामक ग्रन्थ की रचना की गई ।भारतीय चिकित्साशास्त्रके क्षेत्र में इस ग्रंथ को विशेष स्थान प्राप्त है ।
● भास्कराचार्य (1114 -1185 ई. )---ये गणित के सुप्रसिद्ध विद्वान थे । इनके द्वारा ही सर्वप्रथम यह सिद्ध किया गया कि पृथ्वी गोल है । इन्होंने 'सिद्धांत शिरोमणि 'नामक ग्रन्थ की रचना की और शून्य का महत्व बताया
● सुश्रुत, वाग्भट्ट तथा धन्वंतरि ---ये तीनों चिकित्साशास्त्र के क्षेत्र में पारंगत थे । सुश्रुत द्वारा रचित ' सुश्रुत -संहिता ' और वाग्भट्ट की कृति ' अष्टांग हृदय ' चिकित्साशास्त्र के महत्वपूर्ण ग्रन्थ माने जाते हैं । धन्वंतरि तो आयुर्वेद के क्षेत्र में इतने अधिक दक्ष थे कि 'आयुर्वेद का जनक' ही धन्वंतरि को माना जाता है ।
● सवाई राजा जयसिंंह ( 1686 -1743 ई०)---जयपुर के राजा जयसिंह ने संसार मेेें पहली बार खगोलीय वेधशालाओ का निर्माण करवाया ।उन्होंने जयपुर मेेें एक विशाल 'सौर्य घड़ी' का भी निर्माण करवाया।