भारत विश्व में जूट से बने उत्पादों का सबसे बड़ा उत्पादक देश है तथा कुल वैश्विक उत्पादन में 35% योगदान है यह एक श्रम गहन उद्योग है जो प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष तौर पर 3 लाख लोगों से अधिक लोगों को रोजगार प्रदान किए हैं भारत में आधुनिक गढ़ की प्रथम जूट फैक्ट्री स्थापना पश्चिम बंगाल के रिशरा नामक का स्थान पर हुई तथा 1947 तक जूट मिलों की कुल संख्या 112 हो गई थी परंतु विभाजन का सबसे नकारात्मक प्रभाव जिस उद्योग पर पड़ा हुआ जूट उद्योग था क्योंकि जूट उत्पादन अधिकांश भाग पूर्वी पाकिस्तान में चला गया जबकि अधिकांश मिले भारत में रह गई जिसके कारण इन मिलों को कच्चे माल की कमी से जूझना पड़ा ।
आजादी के बाद कच्चे माल की कमी को दूर करने के लिए पटसन कृषि को प्रोत्साहन दिया गया तथा ब्रह्मपुत्र घाटी तराई प्रदेश एवं पूर्वी तटीय मैदान डेल्टाई प्रदेशों में नियोजित गढ़ से इसका विकास किया गया परिणाम स्वरुप 1961 में जूट मिलों की संख्या बढ़कर 122 हो गई ।
जूट उद्योग का स्थानीयकरण -
पटसन एक शुद्ध कच्चा माल है इससे संबंधित उद्योग बाजार केंद्र के पास भी स्थापित किए जा सकते हैं परंतु भारत के इस उद्योग का केंद्र पटसन उत्पादक क्षेत्रों में है जिसका प्रमुख कारण फसल उत्पादन का सस्ता होना है अतः यह उद्योग अधिक परिवहन सहज नहीं कर सकते हैं भारत में यह उद्योग मूल रूप से पश्चिम बंगाल असम की ब्रह्मपुत्र बेसिन तथा पश्चिम बंगाल व बिहार के कुछ जिलों में केंद्रित है इसके आंध्र प्रदेश गोदावरी डेल्टा के कुछ क्षेत्रों में स्थानीय जल विद्युत की सुविधा एवं अनुकूल जलवायु के कारण इस उद्योग का विकास हुआ ।