खिल्जी वंश (1290-1320)
खिल्जी वंश की स्थापना जलालुद्दीन फिरोज खिल्जी ने की थी।
इसने किलोखरी को अपना राजधानी बनाया।
अलाउद्दीन खिल्जी 1296 ई0 में जलालुद्दीन की हत्या करके गद्दी पर बैठा। इसने सिकन्दर द्वितीय, सिकन्दर-ए-सानी की उपाधि धारण किया।
अलाउद्दीन खिलजी के समय सबसे अधिक मंगोल आक्रमण हुआ। उसने मंगोलों से दिल्ली की रक्षा के लिए सीरी दुर्ग का निर्माण करवाया।
मंगोल आक्रमण से निपटने के लिए अलाउद्दीन ने ‘रक्त एवं तलवार’ नीति अपनाया।
अलाउद्दीन के समय सिन्धु नदी दिल्ली के और मंगोलों के बीच की सीमा थी।
अलाउद्दीन ने 1303 में चितौड़ की विजय किया। इसका एक कारण राजा रत्न सिंह की रानी पदामिनी भी थी। उसने चितौड़ का नाम खिज्राबाद कर दिया था।
अलाउद्दीन के समय दक्षिण के राज्यों की विजय मलिक काफूर (हिजड़ा) ने किया।
घोड़ो को दागने एवं सैनिकों के हुलिया रखने की प्रथा की शुरूआत सर्वप्रथम अलाउद्दीन खिल्जी ने की थी।
अलाउद्दीन खिल्जी ने सेना को नगद वेतन देने एवं स्थायी सेना रखने की नींव रखी। इसने एक अस्पा सैनिको को 234 टका एवं द्वि अस्पा सैनिकों को 312 टका नकद वेतन दिया।
अलाउद्दीन खिल्जी ने भूराजस्व के दर को बढ़ाकर 1/2 कर दिया।
अलाउद्दीन खिल्जी ने गृह कर एंव चराई कर लगाये।
अलाउद्दीन खिल्जी ने बाजार मूल्य नियंत्रण प्रणाली लागू किया। अलाउद्दीन पहला मध्यकालीन शासक था जिसने सार्वजनिक वितरण प्रणाली प्रारम्भ किया था।