अमीर खुसरो (1253-1325 ई0)

अमीर खुसरो (1253-1325 ई0)

      अमीर खुसरों का जन्म 1253 ई0 में पटियाली (एटा जिला) इटावा में हुआ था। उसे तूतिए हिन्द के नाम से जाना जाता हैं। अमीर खुसरों ने आठ सुल्तानों का शासन देखा था। यह मंगोलों द्वारा बंदी बना लिया गया था। यह निजामुद्दीन औलिया का शिष्य था जिसने खुसरों को तुर्कल्लाह की उपाधि दिया था। उसने खड़ी बोली का आविष्कार किया। अमीर खुसरो द रबारी कवि के पद पर सर्वप्रथम अलाउद्दीन खिलजी के काल मंे नियुक्त हुआ। अमीर खुसरो की प्रमुख कृतियाँ- किरानुस सादैन, खजाननुल फुतुह, आशिका, तुगलकनामा, नूह सिपिर इत्यादि।

      अलाउद्दीन की मृत्यु बरनी के अनुसार जलोदर रोग से हुई थी।

      अलाउद्दीन ने अलाई दरवाजा, हजार सितून एवं जमैयत खाना मस्जिद आदि का निर्माण दिल्ली में करवाया था। 

      अलाउद्दीन के चित्तौड़ आक्रमण के समय अमीर खुसरो उसके साथ था।

      अमीर खुसरो को तबला एवं सितार जैसे वाद्य यंत्रो का अविष्कारक माना जाता है।

      सराए-ए-अदल में कपड़ा, शक्कर,जड़ी बूटी, मेवा एवं वस्तुये बिकने आती थी।

      अलाउद्दीन प्रथम मुस्लिम शासक था जिसमें मिल्क, इनाम एवं वक्फ के अन्तर्गत दी गयी भूमि को वापस लेकर उसे खालसा भूमि में बदल दिया।

      जजिया कर गैर मुस्लिमो से लिया जाता था।

      जकात यह धार्मिक कर था मुस्लमानों से लिया जाता था यह सम्पत्ति का 40वाँ भाग होता था।

      मुबारक खिल्जी 1316ई0में गद्दी पर बैठा उसने स्वयं खलीफा घोशित किया।

      इतिहासकार बरनी के अनुसार मुबारक खिल्जी कभी-कभी दरबार में नंगे(बिना कपडे़ के) ही चला आता था।

      मुबारक खिल्जी के वजीर खुसरों खाँ ने 1320ई0 को इसकी हत्या कर दी और स्वयं दिल्ली के सिंहासन पर बैठा।

      खुसरों खाँ ने पैगम्बर के सेनापति की उपाधि धारण की।
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