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राबर्ट क्लाइव बंगाल में पहला ब्रिटिश शासक था।
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वर्ष 1760 से 1765 तक हालवेल तथा हेनरी बेनसीटार्ट प्रशासक रहे।
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वर्ष 1765 से 1767 तक राबर्ट क्लाइव का दूसरा कार्यकाल पूरा हुआ।
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वर्ष 1765से 1772 तक बंगाल में द्वैध शासन की व्यवस्था लागू रही।
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रॉबर्ट क्लाइव ने उपहार लेने और निजी व्यापार पर प्रतिबन्ध लगा दिया।
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वर्ष 1772 में वॉरेन हेस्टिंग्स ने बंगाल के गवर्नर के रूप में द्वैध शासन को समाप्त किया।
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वर्ष 1774 में वॉरेन हेस्टिंग्स को बंगाल का प्रथम गवर्नर जनरल नियुक्ति किया गया।
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वॉरेन हेस्टिंग्स ने राजस्व सुधारो को व्यवस्थित करने के लिए परीक्षण और अशुद्धि के नियम को अपनाया।
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वॉरेन हेस्टिंग्स पर वर्ष 1787 से वर्ष 1795 तक महाभियोग का मुकदमा चलाया गया पर सिद्ध नहीं हो पाया।
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कलकत्ता में एशियाटिक सोसायटी की स्थापना (1784) के समय बंगाल का गवर्नर जनरल लॉर्ड वॉरेन हेस्टिंग्स था।
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कानून की विशिष्टता एवं शक्ति पृथ्क्करण सिद्धान्त लॉर्ड कार्नवालिस ने लागू किया।
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गवर्नर जनरल लॉर्ड कार्नवालिस ने भारत की प्रसंविदाबद्ध सिविल सेवा का सृजन किया।
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भारत में इस्तमरारी अथवा स्थायी बन्दोंबस्त के प्रवर्तक लॉर्ड कार्नवालिस थे।
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सहायक संधियों का दौर लॉर्ड वेले जली के काल में प्रारम्भ हुआ।
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सगौली की सन्धि लॉर्ड हेस्टिंग्स के काल में हुई।
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लॉर्ड एलेंबरो के काल के दौरान अगस्त,1843 में सिंध को पूर्ण रूप से ब्रिटिश साम्राज्य में मिला लिया गया।
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वर्ष 1829 में बंगाल के गवर्नर जनरल लॉर्ड विलियम बैंटिक ने सती प्रथा को समाप्त कर दिया।
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राज्य विलय का सिद्धान्त गवर्नर जनरल लॉर्ड डलहौजी के द्वारा लागू किया गया।
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भारत में प्रथम रेलवे लाइन (1853, मुंबई से थाणे) पब्लिक वर्क डिपार्टमेंट का गठन करने वाला गवर्नर जनरल लॉर्ड डलहौजी था।
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ब्रिटिश भारत का प्रथम वायसराय लॉर्ड कैनिंग था, जिसने 1 नवंबर , 1858 को महारानी विक्टोरिया का घोषणा पत्र पढ़ कर सुनाया।
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गवर्नर जनरल लॉर्ड एलेनबरो ने वर्ष 1843 में दास प्रथा का उन्मूलन किया।
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द्वितीय आंग्ल मराठा युद्ध लॉर्ड वेलेजली के काल में हुआ था।
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पेशवाई , गवर्नर जनरल लॉर्ड हेस्टिंग्स के काल में समाप्त की गई।
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चतुराई पूर्ण निष्क्रियता या कुशल अक्रमन्यता की नीति आंग्ल अफगान सम्बन्ध के सन्दर्भ में लॉर्ड लॉरेंस द्वारा प्रारम्भ की गई ।