1789 की फ्रांसीसी क्रान्ति का प्रभाव
एक ओर कुछ विद्वानों ने फ्रासीसी क्रान्ति को विनाशकारी, अप्रगतिशील तथा अराजकतावादी आन्दोलन कहा है, तो दूसरी ओर विद्वानों ने इसे विश्व की महानतम घटना कहा है। यह विश्व क्रांति थी, जिसने समूची मानव जाति के इतिहास पर गहरी छाप छोड़ी।
फ्रांस पर प्रभाव
यद्यपि क्रांति के प्रारंभ के प्रथम दशक में फ्रांस में भीषण अस्त-व्यस्तता, अस्थिरता, भारी उथल-पुथल और अमानुषिक रक्तपात हुआ, पर फिर भी उसका तात्कालिक और स्थायी प्रभाव फ्रांस पर पड़ा। इस प्रभाव का विश्लेषण अधोलिखित है।
राजनीतिक प्रभाव
- निरंकुश शासन का अंत और गणतंत्र की स्थापना- इस क्रांति से फ्रांस में पुराना निरंकुशता और तानाशाही का युग समाप्त हो गया। दैवी अधिकारों के सिद्धांत पर आधारित राजतंत्र समाप्त हो गया और उसके स्थान पर संवैधानिक राजतंत्र और बाद में गणतंत्र स्थापित हो गया।
- लिखित संविधान- क्रांति के बाद फ्रांस के लिए लिखित संविधान बनाया गया जिसमें व्यवस्थापिका, कार्यपालिका, और न्यायपालिका के अधिकार और कर्तव्य स्पष्ट किये गये और नागरिकों को मत देने का अधिकार प्राप्त हुआ। यह संविधान फ्रांस का ही नहीं, अपितु यूरोप का भी प्रथम लिखित संविधान था।
- लोकप्रिय सम्प्रभुता का सिद्धांत- क्रांति ने राज्य के संबंध में एक नवीन धारणा को जन्म दिया और राजनीति में नवीन सिद्धांत प्रतिपादित किये। लोकप्रियता जनता में निहित होती है। इस क्रांति ने यह प्रमाणित कर दिया कि प्रजा ही वास्तव में राजनीतिक अधिकारों की स्वामी है और सार्वभैाम या सार्वजनिक सत्ता उसके पास ही है।
- मानव अधिकारों की घोषणा- क्रांति के दौरान मानव के मौलिक अधिकारों की घोषणा की गर्इ। उसमें मनुष्य के बहुमुखी विकास के लिए आवश्यक मूलभूत अधिकारों को स्पष्ट शब्दो में अभिव्यक्त किया गया। कानून की दृष्टि में सभी नागरिकों को समानता प्रदान की गर्इ। इससे जन सामान्य की आशा-आकांक्षा का विस्तार हुआ और फ्रासं में एक लाके तंत्रीय समाज का निर्माण हुआ।
- प्रशासन में सुधार- क्रांति के बाद प्रशासन का पुर्नगठन किया गया। फ्रासं को समान 83 भागां े में विभक्त कर उनको कैन्टनों और कम्यनूों में विभाजित किया। उनमें प्रशासन के लिये नागरिकों द्वारा निर्वाचित सभाएं स्थापित की गर्इ। पदों पर सुयोगय और सक्षम अधिकारी नियुक्त किय गए। पक्षपातपूर्ण कर व्यवस्था तथा अव्यवस्थित फिजूल खर्चियों के स्थान पर समान कर-व्यवस्था और नियमित बजट प्रणाली स्थापित की गर्इ। न्याय-व्यवस्था में भी परिवर्तन किया गया। न्यायालयों को कार्यकारिणी और व्यवस्थापिका के प्रभाव और नियंत्रण से मुक्त कर दिया गया। फाजैदारी मकुदमों के लिये ‘ज्यूरी प्रथा’ प्रारंभ की गर्इ। वंशानुगत और भ्रष्ट न्यायाधीशो के स्थान पर नव निर्वाचित न्यायाधीशो की व्यवस्था की गर्इ।
- समान कानून और कानूनों का संग्रह- कानूनों की विविधता समाप्त कर दी गर्इ। नेपोलियन ने विभिन्न कानूनों को एक करके दीवानी, फौजदारी तथा अन्य कानूनों का व्यवस्थित संग्रह करवाया जिससे फ्रांस में एक सी कानून व्यवस्था स्थापित की गर्इ। इस कानून-संग्रह को ‘‘कोड ऑफ नेपोलियन’’ कहते हैं। बाद में आस्ट्रिया, इटली, जर्मनी, बेल्जियम, हॉलेण्ड और अमेरिका आदि देशों में भी काडे ऑफ नेपोलियन में आवश्यकतानुसार आंशिक परिवर्तन करके उसे लागू कर दिया गया।