फूट डालो और शासन करो की ब्रिटिश नीति क्या थी ?

  • प्रत्येक  साम्राज्यवादी देश  विजित देश की जनता में फूट डालकर अपने शासन को बनाए रखता है ।
  • जनता में मौजूद मतभेदो का लाभ उठाया जाता है । एक समुदाय को दूसरे से लड़ाकर या एक के विरुद्ध दूसरे को समर्थन देकर नए मतभेद पैदा किए जाते हैं ।
  •  अंग्रेज़ अपने शासन को राजाओं और ज़मींदारों के सहयोग से मज़बूत स्थिति प्रदान कर रहे थे । देश के कई भागों में नई भूमि व्यवस्थाओ के अंतर्गत ज़मीनदारी समाप्त हो गयी ।
  • १८५७ ईसा पूर्व  के विद्रोह को कुचल देने के बाद अवध में तालुकदारो को  ज़मीन वापस कर दी गई ।अंग्रेजों ने ज़मीनदारो के पुत्रों को नौकरिया दी एवम एस प्रकार शिक्षित भारतीयों के साथ मतभेद कम किया ।
  • भारतीय राज्यों के प्रति अंग्रेजों की नीति ने भारतीय जनता को दो समुदायों मैं बाँट दिया -भारतीय राज्यों की जनता और ब्रिटिश भारत की जनता ।
  • सैनिक प्रशासन में भी उन्होंने वही नीति अपनायी। १८५७ ईसा पूर्व के विद्रोह  में हिंदू और मुसलमान कंधे से कंधा मिलाकर अंग्रेजों के विरुद्ध लड़े थे ।
  • १८५८  ईसा पूर्व के बाद अंग्रेजों ने हिन्दुओं और मुसलमानों में फूट  डालने की नीति अपनायी ।
  • अंग्रेजों ने मुसलमानों को अपना मुख्य शत्रु माना ,क्योंकि उन्हे १८५७ई० के विद्रोह के लिए ज़िम्मेदार समझा गया ।नौकरियां देने में उनके साथ भेदभाव किया गया।
  • अंग्रेजों ने इतिहास की अपनी पुस्तकों  में यह दिखाने की कोशिश की कि मुसलमानों ने हिन्दुओं का दमन किया ,इसलिए हिन्दूओ का हित इसी में है कि वे ब्रिटिश शासन का समर्थन करें ।
Posted on by