अगर आप अपने मेल पर निगाह डालें तो कभी ना कभी आप रूबरू हुए होंगे कि कभी आपको रिजर्व बैंक की तरफ से मेल आता है कि आपको लाखों रुपए बैंक दे रहा है लेकिन आपको पेपर वर्क के लिए पहले 10 से ₹15000 देने होंगे ।कभी नौकरी वह भी मारुति जैसे प्रतिष्ठान से वहां भी लिखा होगा कि ₹15000 आप भेजें जिससे वे आप का हवाई टिकट भेज सकें ।दरअसल अब साइबर क्राइम का दायरा दिनों दिन बढ़ता जा रहा है आप ठगे भी जा सकते हैं ।मन मानसिक रूप से आहत भी किए जा सकते हैं ।आप ब्लैकमेल भी हो सकते हैं। जरूरत है सावधान की साइबर शब्द सबसे पहले विलियम गिब्सन ने अपने उपन्यास न्यूरो मेंसर 1984 में गढ़ा था।
भारतीय कानून में साइबर अपराध की कोई परिभाषा नहीं है। भारतीय दंड संहिता में तो इसका जिक्र भी नहीं है किंतु कैंब्रिज एडवांस्ड लर्नर्स डिक्शनरी के अनुसार साइबर अपराध वह अपराध है जो कंप्यूटर खासकर इंटरनेट के जरिए या उससे जुड़ा होता है। सीधी सरल भाषा में कहें तो साइबर अपराध एक अवैध कृत्य है ।जिसमें कंप्यूटर साधन या लक्ष्य अथवा दोनों हैं ।आईटी अधिनियम 2000 भारत में साइबर कानून की बुनियाद है। जिसमें आईटी संशोधन अधिनियम 2008 के जरिए संशोधन किया गया। इसमें साइबर अपराधों के लिए दीवानी अदालतों में मुकदमा चलाने और दंड का प्रावधान है ।साइबर अपराध में साइबर नियमों का उल्लंघन और साइबर अपराध दोनों शामिल हैं।