भारतीय संविधान Easy Notes - 80 (स्वतंत्रता का अधिकार -2)

Day- 80

  • अनुच्छेद 21 के अनुसार किसी व्यक्ति को उसके प्राण और दैहिक स्वतंत्रता से विधि द्वारा स्थापित प्रक्रिया के अनुसार ही वंचित किया जाएगा अन्यथा नहीं।
  • अमेरिकी संविधान में प्रयुक्त अभिव्यक्ति ‘विधि की सम्यक प्रक्रिया’ को भारतीय संविधान में विधि द्वारा स्थापित प्रक्रिया के रूप में प्रयोग किया गया हैं।
  •  उच्चतम न्यायालय के निर्णय के फलस्वरूप बहुत से अधिकार अनुच्छेद 21 के अंतर्गत माने गए हैं –

              1.  वंचित श्रमिक ना बनाए जाने का अधिकार

               2.  ऐसे साधनों से जीविकोपार्जन का अधिकार जो अवैध अनैतिक या लोक नीति के विरुद्ध नहीं है

               3. अच्छे पर्यावरण का अधिकार

               4. आश्रय का अधिकार

               5. विदेश यात्रा का अधिकार

                6. शीघ्र विचारण का अधिकार

                 7.विधिक सहायता का अधिकार

                 8. प्राइवेसी (एकांतता) का अधिकार

                 9. एकांत कारावास के विरुध्द अधिकार

                10. पैर मे डंडा, बेड़ी डालने के विरुध्द अधिकार

                 11.  हथकड़ी लगाने के विरुध्द अधिकार

                 12.  फांसी में विलंब के विरुध्द अधिकार

                  13.  अभिरक्षा में हिंसा के विरुध्द अधिकार

                  14.  शिक्षा का अधिकार ( वृत्तिक या विशेष शिक्षा नहीं)

                  15.  पीने योग्य शुद्ध जल का अधिकार

                  16.  अच्छी सड़कों का अधिकार

                   17.  प्रतिष्ठा का अधिकार

  •  संविधान (86 वां संशोधन) अधिनियम, 2002 के द्वारा नया अनुच्छेद 21-क अंतःस्थापित करके एक नया मूल अधिकार बनाया गया है। इसके द्वारा राज्य को यह कर्तव्य सौंपा गया है कि 6 से 14 वर्ष की आयु के सभी बालकों को निशुल्क और अनिवार्य शिक्षा प्रदान करेगा। शिक्षा समवर्ती सूची का विषय है इसलिए राज्य और संघ दोनों ही विधि बना सकते हैं।
  •   इसी (86 वें) संशोधन द्वारा अनुच्छेद 45 के स्थान पर दूसरा निदेशक तत्व रखा गया है। पुराना निदेशक तत्व बालकों की निशुल्क और अनिवार्य शिक्षा के बारे में था। नए अनुच्छेद 45 द्वारा राज्य को यह निर्देश दिया गया है कि 6 वर्ष से कम आयु के बच्चों की देखरेख और शिक्षा का प्रबंध करेगा।
  •   86 वें संशोधन से अनुच्छेद 51-क में एक नया मूल कर्तव्य जोड़ा गया है। इसके अनुसार प्रत्येक माता-पिता या अभिभावक का यह कर्तव्य है कि वह अपने बालक या प्रतिपाल्य के लिए 6 से 14 वर्ष की आयु के बीच शिक्षा के अवसर प्रदान करें।
  •   अनुच्छेद 21 प्राण और दैहिक स्वतंत्रता का अधिकार प्रत्याभूत करता है। विधान-मंडल विधि अधिनियमित करके किसी व्यक्ति को उसके अधिकार से वंचित कर सकता है।
  • अनुच्छेद 21 पर महत्वपूर्ण वाद निम्नलिखित है-

                               I.  ए. के. गोपालन बनाम स्टेट आफ मद्रास (AIR 1952)S.C.

                               II.  खड़क सिंह बनाम स्टेट आफ उत्तर प्रदेश (AIR 1963) S.C.

                              III.  सतवन्त सिंह साहनी बनाम असिस्टेन्ट पासपोर्ट अथॉरिटी नई दिल्ली (AIR 1967 S.C. 1936)

                             IV.   मेनका गांधी बनाम यूनियन ऑफ़ इंडिया (AIR 1978)

                             V.    सुनील बात्रा बनाम एडमिनिस्ट्रेशन आफ दिल्ली

                             VI.    चार्ल्स शोभराज बनाम अन्य एडमिनिस्ट्रेशन आफ दिल्ली (1978)

  • अनुच्छेद 22 गिरफ्तारी और निरोध से संरक्षण प्रदान करता है। अनुच्छेद 22 के अंतर्गत गिरफ्तारी के विरूध्द निम्नांकित संरक्षणों का उल्लेख किया गया है-

                    1.      गिरफ्तारी के कारण जानने का अधिकार

                    2.      अपनी रूचि के विधि-व्यवसायी से परामर्श करने का अधिकार

                    3.      गिरफ्तारी के बाद 24 घंटों में मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश करने का अधिकार

आगे अब हम चलते है  'शोषण के विरुध्द अधिकार' पर चर्चा के लिये ..

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