फिरोज तुगलक ने लोक कल्याणकारी कार्य-
दिवान-ए-वन्दगान (दास विभाग)-180000 दास थे। इनमें से 12000 दास शिल्पियों के रूप में कार्य करते थे।
दीवान-ए-खैरात- दान विभाग
दीवान-ए-इस्तिहाक- पेंशन विभाग
रोजगार दफ्तर
दारूलसफा या शिफाखाना-चिकित्सालय
अलमखाना-पताका निर्माण
जमादारखाना-शाही वस्त्रालय
कुर खाना-शाही शस्त्रागार, फर्राशखाना-कालीन तैयार होता था।
फिरोज तुगलक ने सर्वप्रथम लोक निर्माण विभाग की स्थापना किया इसने ही मेरठ एवं टोपरा से दो अशोक स्तम्भ को लाकर दिल्ली में स्थापित करवाया।
फिरोज तुगलक ने शिक्षा का व्यावसायिक पाठ्यक्रम लागू किया और विद्वानों ाके सरकारी निर्वाह भत्ता एवं विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति प्रदान किया थां
दलायले-फिरोजशाही दर्शन एवं नक्षत्र विज्ञान से सम्बन्धित पुस्तक है।
फिरोज तुगलक ने शंशगनी (6 जीतल) नामक चाँदी का सिक्का चलाया।
फिरोज ने मुस्लिम स्त्रियों को मजारों पर जाने पर प्रतिबन्ध लगा दिया था।
शम्सुद्दीन दमगानी (गुजरात) का विद्रोह फिरोज तुगलक के समय हुआ।
फिरोज तुगलक ने कुतुबमीनार की पाँचवी मंजिल का निर्माण करवाया।
परवर्ती तुगलक शासकों का क्रम-फिरोज तुगलक-गयासुद्दीन तुगलक द्वितीय-अबुबक्र- नासिरूद्दीन मोहम्मद शाह-अलाउद्दीन सिकन्दर शाह-नासिरूद्दीन महमूद (1394-1414) यह तुगलक वंश का अन्तिम शासक इसी के समय में तैमूर (भाग्यशाली) का 1398 में दिल्ली पर आक्रमण हुआ।