परवर्ती तुगलक शासकों का क्रम-फिरोज तुगलक-गयासुद्दीन तुगलक द्वितीय-अबुबक्र- नासिरूद्दीन मोहम्मद शाह-अलाउद्दीन सिकन्दर शाह-नासिरूद्दीन महमूद (1394-1414) यह तुगलक वंश का अन्तिम शासक इसी के समय में तैमूर (भाग्यशाली) का 1398 में दिल्ली पर आक्रमण हुआ।
होली में भाग लेने वाला प्रथम सुल्तान मुहम्मद तुगलक था।
मुहम्मद तुगलक ने जैन विद्वान जिनप्रभासूरी, जम्बूजी एवं राजशेखर को संरक्षण दिया।
मुहम्मद तुगलक सल्तनत काल का प्रथम शासक था जिसने ख्वाजा मुइनुद्दीन चिस्ती (अजमेर) और सलार मसूदगाजी (बहराइच) के मकबरे का दर्शन किया था।
मुहम्मद तुगलक की प्रमुख योजनाएँ दो-आब में राजस्व वृद्धि (1325) उसने सर्वप्रथम सूबो की आय-व्यय का हिसाब रखने के लिए रजिस्टर तैयार करवाया।
राजधानी परिवर्तन 1326-27 ई0 दिल्ली से दौलताबाद (कुब्वत-उल-इस्लाम)
सांकेतिक मुद्रा का प्रचलन (1329 ई0) -उसने चाँदी सिक्के (टका) के स्थान पर काँसे या पीतल का सिक्का चलवाया। उसने सिक्कों पर कलमा लिखवाना बन्द करवा दिया।
खुरासान एवं कराचिल विजय-1330-31
गयासुद्दीन तुगलक ने सिंचाई के लिये कूए एवं नहरों का निर्माण करवाया।
गयासुद्दीन तुगलक नहरोें का निर्माण करने वाला प्रथम मुस्लिम शासक था।
उसने दिल्ली के समीप तुगलकाबाद नामक नये नगर की स्थापना की।
गयासुद्दीन तुगलक ने दिल्ली के प्रसिद्ध सूफी संत निजामउद्दीनऔलिया को उसके दिल्ली लौटने से पहले दिल्ली छोड़ कर चले जाने का फरमान दिया था।
इसी अवसर पर सूफी संत निजामद्दीन औलिया द्वारा प्रसिद्ध कथन-ष्अभी दिल्ली दूर हैष् कहा गया था।
गयासुद्दीन तुगलक की मृत्यु 1325 ई0 में बंगाल अभियान से लौटते समय उसके पुत्र जूनाखाँ (मुहम्मदबिन तुगलक) द्वारा निर्मित लकड़ी के स्वागत भवन में दबकर हो गयी।
गयासुद्दीन तुगलक के बाद जूना खाँ मुहम्मद तुगलक (1325-1351ई0) के नाम से दिल्ली के सिंहासन पर बैठा।
मुहम्मद तुगलक ने कृषि के विकास के लिये अमीर-ए-कोही नामक नये विभाग की स्थापना की।
उसने अपनी राजधानी दिल्ली से देवगिरी स्थानांतरित किया।
देवगिरि को कुवत-उल-इस्लाम भी कहा जाता है।
मोरक्को निवासी अफ्रीकी यात्री इब्नबतूता 1335ई0 मंे भारत आया था इसने रेहला नाम की पुस्तक लिखी।
मुहम्मद बिन तुगलक के शासन काल में ही दक्षिण में हरिहर एवं बुक्का नामक दो भइयों ने 1336ई0 में विजय नगर साम्राज्य की स्थापना की थी।
अलाउद्दीन बहमन शाह 1347 ई0 में बहमनी राज्य की स्थापना की थी।
मुहम्मद बिन तुगलक सल्तनत का पहला शासक था जो अजमेर में शेख मुइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह और बहराइच में सालार मसूद गाजी के मकबरे पर गया।
20 मार्च 1351 ई में फिरोज तुगलक( 1388ई0 तक) गद्दी पर बैठा। इसका दो बार राज्याभिषेक हुआ था।
खलीफा द्वारा इसे कासिम अमीर उल मोममीन की उपाधि दी गयी।
फिरोज ने अपने शासन काल में 24 कष्टकारी करो को समाप्त कर दिया था और इस्लाम द्वारा समर्पित चार करों खराज(लगान) खुम्स (युद्व में लूट का माल) जजिया एवं जकात को वसूल करने का आदेश दिया।
फिरोज तुगलक प्रथम मुसलमान शासक था जिसने ब्राह्मणों पर भी जजिया कर लगाया।
मुस्लिम इतिहास में फिरोज तुगलक ही एकमात्र एक ऐसा शासक था जिसने स्वयं को ष्खलीफा का नायबष् कहा था।
उसने गृह कर एवं शर्ब नामक सिंचाई कर लगाया जो उपज का 1/10 भाग था।
फिरोज तुगलक ने 5 बड़ी नहरों का निर्माण करवाया था। इसका विस्तृत वर्णन याहिया बिन अहमद सरहिन्दी की पुस्तक तारीख-मुबारकशाही में मिलता है।
फिरोज तुगलक ने अपने भाई जौनाखाँ की स्मृति में जौनपुर नगर की स्थापना की थी।
जौनपुर नगर के अलावाँ उसके द्वारा बसाये गये अन्य नगर फिरोजबाद, हिसार फिरोजा आदि।
सुल्तान फिरोज तुगलक ने अनाथ, मुस्लिम विधवा, महिलाओं तथा लड़कियोें की सहायता के लिए एक नये विभाग दीवान ए खैरात की स्थापना की।
इसने सैन्य पदों को वंशानुगत बना दिया।
इसने अपनी आत्म कथा ष्फुतहात-ए-फिरोजशाहीष् की रचना की।
तैमूर लंग ने सुल्तान नासिरूद्दीन महमूद तुगलक के समय मे ंदिल्ली पर आक्रमण किया था।
नासिरूद्दीन के समय में एक हिजडे़ मलिक सरवर ने मलिक-उश-शर्क (पूर्व की उपाधि) धारण कर जौनपुर में एक स्वतन्त्र राज्य की स्थापना किया था। नासिरूद्दीन तुगलक वंश का अंतिम शासक था।